नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमत में हाल में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की भारी जीत से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद बंधी है। इससे कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। इस बीच दुनिया में ट्रांजिट में क्रूड का वॉल्यूम ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय करीब 1.28 अरब बैरल कच्चा तेल ट्रांजिट में है जो भारत की करीब 8 महीने की डिमांड पूरी कर सकता है।
ट्रांजिट में चल रहे क्रूड की मात्रा में हाल के दिनों में 18 करोड़ बैरल से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और दूसरे वैकल्पिक रास्तों के जरिए खाड़ी से आने वाले कच्चे तेल की सप्लाई में सुधार हुआ है। साथ ही कच्चे तेल का आयात करने वाले देश दूरदराज के देशों से तेल मंगा रहे हैं जिससे जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसलिए ट्रांजिट में कच्चे तेल की मात्रा रिकॉर्ड पर पहुंच गई है।
वेनेजुएला से भारतमसलन भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है। हाल के महीनों में भारत ने वेनेजुएला से भी तेल का आयात शुरू किया है। भारत से वेनेजुएला की दूरी करीब 15,000 किमी है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमूमन एक ऑयल टैंकर को वेनेजुएला के होजे टर्मिनल से भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने में 45 से 60 दिन का समय लगता है। यह रूट और मौसम पर भी निर्भर करता है।
अक्टूबर में भारत का क्रूड इम्पोर्ट रोजाना 56 लाख बैरल के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। एनर्जी इंटेलीजेंस फर्म Kpler के मुताबिक इस दौरान भारत ने पश्चिम एशिया से रोजाना करीब 23 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया जबकि रूस से करीब 20 लाख बैरल तेल आया। शिप-टू-शिप ट्रांसफर बढ़ने से खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति में पिछले दो महीनों में सुधार आया है।
भारत की तेल खपत अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। देश में कच्चे तेल की रोजाना खपत करीब 55 लाख बैरल है। यानी समुद्र में अभी जितना कच्चा तेल ट्रांजिट में है, उससे भारत की 232 दिन यानी करीब 8 महीने की डिमांड पूरी हो सकती है।
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