खुशियों और रोशनी का त्योहार दिवाली करीब है। हालांकि, अंधकार पर प्रकाश के विजय का प्रतीक यह पर्व केवल दीप जलाने का उत्सव नहीं हैं, बल्कि अपने मन, आसपास और समाज में भी प्यार, अच्छाई और मानवता का प्रकाश फैलाने का अवसर है। ऐसे में, हमारे बॉलिवुड सितारों ने 'उपमा सिंह' को बताया कि वे इस दिवाली समाज से किस बुराई की अंधियारा मिटते और किस अच्छाई का उजाला फैलते देखना चाहते हैं:




प्यार और भाईचारा वापस आना चाहिए: दिव्या दत्तामुझे सच में और बहुत दिल से लगता है कि हम दयाभाव और संवेदनशीलता भूल रहे हैं, वह वापस आना चाहिए। हमें लगता है कि जो हैं, बस हम ही हैं। बाकी जो जीव-जन्तु हैं, पेड़ हैं, उनकी परवाह करना हम भूलते जा रहे हैं। जबकि, मेरे लिए वातावरण के साथ को-एग्जिस्ट करना बहुत ज्यादा मायने रखता है और मैं बहुत मजबूती से यह महसूस करती हूं कि वह सहभागिता वाला अहसास वापस आना चाहिए। वो जो प्यार-मोहब्बत, भाईचारा था, ये वापस आना चाहिए।




इंसानियत का उजाला बना रहे: मनोज बाजपेयीएक समय में हमारा समाज बहुत अच्छे से सबके साथ मिलकर को-एग्जिस्ट करता था। अब जानवरों, पक्षियों को लेकर तो हमारा रुख बद से बदतर हो गया है। ये सोचने वाली बात है कि इंसान अपनी इंसानियत ही भूलता जा रहा है। हम धीरे धीरे इंसान होना बंद हो रहे हैं। इसलिए, लोगों को सोचना पड़ेगा कि वे जा कहां रहे हैं। अगर आप पाप-पुण्य और कर्म में विश्वास रखते है तब तो और भी डरना चाहिए कि अपनी इंसानियत न खोएं।




पौधों-जन्तुओं सबके बारे में सोचें : राधिका आप्टेजिस हिसाब से पेड़ कट रहे हैं, मैं वो देखकर दहशत में हूं। आने वाले समय में हमारे शहरों में पेड़ ही नहीं होंगे। पशु पक्षी विलुप्त हो जाएंगे। जलवायु परिवर्तन का असर सब जगह दिख ही रहा है । यह सब देखकर मुझे बहुत डर लगता है। जो नुकसान हाे चुका है उसे तो हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन अभी भी जो है उसे बचा सकते हैं। इसलिए, मेरी ख्वाहिश है कि लोग इसके बारे में सचेत हो जाएं। मेरा लोगों से एक ही आग्रह है कि प्लीज पटाखे मत जलाइए। प्लीज हवा, अपने फेफड़े और बेचारे बेजुबान जानवरों के बारे में सोचिए। वे बेचारे इतने परेशान होते है कि उसे देखकर दिल दुखता है।




नकारात्मकता मिटे, पॉजिटिविटी फैले: जहीर इकबालमैं उम्मीद करता हूं कि लोग ज्यादा पॉजिटिव रहे। लोग मुझे बोलते हैं कि तुम हमेशा इतने पॉजिटिव कैसे रहते हो? मैं पूछता हूं कि आप इतने नेगेटिव क्यों हैं? आप अच्छे घर में रहते हैं, अच्छा खा-पी रहे हैं, फिर भी इतने नेगेटिव हैं। आजकल लोग बहुत ज्यादा नेगेटिव हो गए हैं। आप इंस्टाग्राम खोलकर देखिए, वहां इतनी नेगेटिव बातें होती हैं कि आप भी एक नेगेटिव इंसान बन जाते हैं। आप इंस्टाग्राम पर कुछ भी पोस्ट करो, उस पर नेगेटिव बात ही शुरू हो जाती है। मुझे लगता है कि नेगेटिविटी बहुत ज्यादा हो चुकी है। उस पर थोड़ा कंट्रोल लगना चाहिए।




औरतों को मिले सुरक्षा की रोशनी: कीर्ति सुरेशहाल के दिनों में औरतों के साथ ज्यादती और दुर्व्यवहार की जितनी घटनाएं सामने आई हैं, उससे मुझे बहुत तकलीफ होती है। इन बातों का मेरे दिल और दिमाग पर बहुत असर पड़ता है। इसलिए मैं यही चाहती हूं कि हमारे देश, समाज में औरतों को सुरक्षा की रोशनी मिले। मैं दिवाली पर महिला सुरक्षा का उजाला फैलने की उम्मीद करना चाहूंगी।

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