8 नवम्बर 2026 को कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या प्रातः 10 बजकर 51 मिनट से प्रारम्भ होकर अगले दिन पूर्वाह्न 11:32 तक रहेगी। अर्द्धरात्रि में अमावस्या रहने पर 8 नवम्बर 2026, दीपावली पूजन, मंत्र, जप सिद्धि के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त ज्योतिषशास्त्र के अनुसार लग्न तीन प्रकार की होती हैं, चर, स्थिर एवं द्विस्भाव लग्न। चर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने से लक्ष्मी चलायमान हो जाती हैं, द्विस्भाव लग्न में पूजन करने से लक्ष्मी का आवागमन बना रहता है। स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन किया जाए तो लक्ष्मी का स्थायित्व प्राप्त होता है, अतः दीपावली पर लक्ष्मी पूजन सायंकाल वृष लग्न और सिंह स्थिर लग्न में ही सम्पन्न करें ताकि आपके यहाँ लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास कर सके। विभिन्न शहरों में सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय के अन्तर के कारण मुहूर्त लग्न में चन्द मिनटों का फर्क सम्भव है।
- वृष स्थिर लग्न सायं 05:58 से 07:54 तक
- सिंह स्थिर लग्न रात्रि 12:26 से देर रात 02:40 तक
दीपावली पूजन इस दिन प्रातः पितृगण तथा देवताओं का पूजन करना चाहिए। स्थिर लग्न में श्रीगणेश, कलश, षोडशमातृका एवं ग्रह पूजन के साथ भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। इसके अनन्तर महाकाली का दवात के रूप में, महासरस्वती का कलम, बही आदि के रूप में तथा कुबेर का तुला के रूप में सविधि पूजन करना चाहिए। इसी समय ससंकल्प दीपदान के साथ मंत्र जाप, यन्त्र सिद्धि आदि अनुष्ठान सम्पादित करना चाहिए।
दीपावली की आधी रात पश्चात् जो समय आता है, उसको ‘महानिशा’ काल कहा गया है, जिसमें लक्ष्मी जी की साधना का विशेष महत्व है। महानिशा काल में लक्ष्मी आराधना करने से निसंदेह अक्षय लक्ष्मी प्राप्त होती है। दीपावली की रात्रि में भगवती महालक्ष्मी विश्व भ्रमण पर अपने पतिदेव श्री हरि भगवान विष्णु के साथ निकलती हैं तथा जिस स्थान पर अपनी उपासना-आराधना होते हुए देखती हैं वहीं अपनी स्थायी
निवास बना लेती हैं। माँ लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु, गणेश जी, शिव जी, माँ काली, माँ सरस्वती, कुबेर आदि देवताओं की पूजा भी करनी चाहिए। इस रात्रि श्री सूक्त तथा श्री लक्ष्मी सूक्त का पाठ स्वयं या किसी योग्य पंडित द्वारा कराना चाहिए।