देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराना जेनी प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शनिवार को देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जेनी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया। जेनी ने मामले की दोबारा जांच कराने और अपने बेटे को पिता का नाम दिलाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में उत्तराखंड के डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात कर शिकायत भी दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।




वहीं, हरक सिंह रावत ने इन आरोपों को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस समय का यह मामला है, उस वक्त केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उस समय सीबीआई जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट मिली थी। ऐसे में अब जांच और कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना तत्कालीन सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने जैसा है। हरक ने आरोप लगाया कि बीजेपी अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान भटकाने के लिए पुराने मामले को उठा रही है।




16 साल की उम्र में दुष्कर्म का आरोप, यमुना कॉलोनी में रखने का दावाजेनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि वर्ष 2003 में जब उनकी उम्र महज 16 साल थी, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हरक सिंह रावत ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। उन्होंने बताया कि जब वह देहरादून आई थीं, तब एक एसटीडी बूथ पर काम करती थीं। इसी दौरान एक कार्यकर्ता उन्हें हरक सिंह रावत के पास लेकर गया था।




जेनी के मुताबिक, वह करीब डेढ़ महीने तक हरक सिंह रावत के यहां रही थीं। इस दौरान उन्हें यमुना कॉलोनी में रखा गया और कई होटलों तथा पार्टियों में भी ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि में उनके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया।




जेनी ने बताया कि जब वह गर्भवती हुईं तो उन्हें प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रख दिया गया। उस समय उन्हें हिंदी भी ठीक से नहीं आती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनके वकील ने जहां हस्ताक्षर करने को कहा, उन्होंने वहां हस्ताक्षर कर दिए। उनका यह भी दावा है कि उनकी ओर से नियुक्त वकील भी दूसरे पक्ष की पैरवी कर रहा था।




CBI जांच और बेटे के DNA सैंपल पर उठाए सवालजेनी ने पुराने मामले की सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सीबीआई की टीम उनसे जेल में मिलने केवल एक बार आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके बेटे के डीएनए टेस्ट की बात आई तो उसके सैंपल ही नहीं लिए गए। ऐसे में जांच में किसका डीएनए टेस्ट किया गया, यह स्पष्ट होना चाहिए।




जेनी ने बताया कि वर्ष 2016 में वह दिल्ली में हरक सिंह रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने गई थीं। उस दौरान भी उनके साथ जबरदस्ती किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने उस समय अपने वकील रहे शिव चरण सिंह रावत के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।




जेनी ने कहा कि पिछले 23 साल से उनका बेटा बिना पिता के रह रहा है। वह चाहती हैं कि मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच हो और उनके बेटे को उसके पिता का नाम मिले।




उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से उनका नाम लिए जाने के बाद उन्हें सामने आकर अपनी बात रखने की हिम्मत मिली। इससे पहले पुलिस से संपर्क करने पर उन्हें दोबारा नहीं आने की बात कहकर लौटा दिया गया था। जेनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती हैं।




हरक सिंह रावत का पलटवार, बोले- बीजेपी की राजनीतिक साजिशजेनी के आरोपों पर हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए इसे बीजेपी की राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में बीजेपी की सरकार घबराई हुई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की विशाल रैली और उत्तराखंड में निकाली जा रही न्याय यात्रा सहित अन्य कार्यक्रमों से बीजेपी परेशान है।




हरक सिंह ने कहा कि बीजेपी अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान हटाने के लिए 23 साल पुराने मामले को दोबारा उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिस मामले में बीजेपी की सरकार के दौरान सीबीआई जांच हुई और उन्हें क्लीन चिट मिली, उसे अब राजनीतिक फायदे के लिए उठाया जा रहा है।




पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि जिस समय यह मामला सामने आया था, तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी। ऐसे में उस समय हुई जांच और कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना तत्कालीन सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने जैसा है।




CBI जांच में विजया बर्थवाल और एक अन्य व्यक्ति का आया था नामहरक सिंह रावत ने दावा किया कि सीबीआई ने अपनी जांच में बताया था कि लड़की को विजया बर्थवाल और एक अन्य व्यक्ति ने प्रलोभन दिया था। उनके मुताबिक, सीबीआई की जांच के बाद कोर्ट में मामला पहुंचा और क्लोजर रिपोर्ट को भी मंजूरी मिली थी।




हरक ने कहा कि इस मामले से जुड़े कई सबूत मौजूद हैं। इनमें उस समय की मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल है। इसके अलावा उस दौर में जेनी से मिलने आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी मौजूद हैं, जिनसे पूरे प्रकरण की जानकारी ली जा सकती है।




उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जेनी को कभी नहीं देखा था। उनके कार्यालय में एक व्यक्ति आया था और उसने लड़की की नौकरी लगवाने की बात कही थी। उस समय लड़की वहां मौजूद नहीं थी। हरक के अनुसार, उन्होंने उसे मधुबन में नौकरी दिलाने की बात कही थी, लेकिन होटल में नौकरी के प्रस्ताव पर उस व्यक्ति ने मना कर दिया। इसके बाद लड़की की नौकरी नारी निकेतन में लगवाई गई।




हरक ने कहा कि इस दौरान लड़की दो दिन उनके घर भी रही थी, लेकिन उन्होंने उसे नहीं देखा।




तत्कालीन सीएम ने फोन कर दी थी क्लीन चिट की जानकारीहरक सिंह रावत ने बताया कि जब उनके खिलाफ इस मामले में जांच चल रही थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ने उन्हें फोन कर बधाई दी थी। उन्होंने बताया था कि इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है।




हरक के मुताबिक, जब उन्होंने तिवारी से पूछा कि उन्हें इसकी जानकारी कैसे मिली तो उन्होंने बताया था कि दिल्ली से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का फोन आया था। प्रधानमंत्री ने भी सीबीआई की क्लीन चिट के बारे में जानकारी दी थी।




विजया बर्थवाल और आशा नौटियाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया थाहरक सिंह ने बताया कि सीबीआई से क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने विजया बर्थवाल और आशा नौटियाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, बाद में उन्हें दोनों को माफ करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने सीजेएम कोर्ट से मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया था।




पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश बंद होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कोर्ट से उन्हें बीजेपी की सरकार के दौरान ही क्लीन चिट मिली थी।




जेनी की शिकायत पर जांच शुरू, डोईवाला सीओ को मिली जिम्मेदारीजेनी के गंभीर आरोपों के बाद उत्तराखंड पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को जेनी ने डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात कर शिकायत दी और मामले की दोबारा जांच कराने के साथ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।




डीजीपी कार्यालय की ओर से शिकायत को जांच के लिए देहरादून एसएसपी कार्यालय भेज दिया गया। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि शिकायत की जांच के लिए डोईवाला सीओ वंदना वर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।




जेनी ने अपनी शिकायत में वर्ष 2003 की घटना की विधि सम्मत जांच कराने के साथ ही अपने 23 वर्षीय बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पिछले 23 साल से उनका बेटा अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। वह चाहती हैं कि डीएनए जांच के जरिए उसके पिता की पहचान स्पष्ट हो सके और उसे पिता का नाम मिल सके।




पुलिस के मुताबिक, 7 नवंबर को इंदिरा डेंजी (जैनी) की ओर से पुलिस मुख्यालय को भेजा गया प्रार्थना पत्र देहरादून पुलिस को प्राप्त हुआ। इसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इस घटना के परिणामस्वरूप उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उस समय हरक सिंह रावत ने अपनी राजनीतिक पहुंच और सत्ता में होने का फायदा उठाकर मामले में कार्रवाई नहीं होने दी।




प्रार्थना पत्र में जेनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे की पहचान के लिए उसका डीएनए टेस्ट कराने और वर्ष 2003 के प्रकरण में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।




पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी डोईवाला वंदना वर्मा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। एसएसपी देहरादून ने उन्हें पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।




पहले वीडियो जारी कर नेताओं से की थी राजनीति बंद करने की अपीलइससे पहले जेनी ने एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने उत्तराखंड के नेताओं पर उन्हें बेवजह बदनाम करने और उनके नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था।




जेनी ने कहा था कि उत्तराखंड की राजनीति में उनके नाम का जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, वह गलत है। जिस प्रकरण को लेकर नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, उसमें अब तक किसी ने भी उनसे यह जानने की कोशिश नहीं की कि उस समय उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था।




उन्होंने नेताओं से इस मामले में राजनीति बंद करने की अपील भी की थी।




2026 में मुख्यमंत्री धामी के बयान के बाद फिर चर्चा में आया जेनी प्रकरणउत्तराखंड की राजनीति में जेनी प्रकरण के दोबारा चर्चा में आने की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 24 अक्टूबर को दिए गए एक बयान के बाद हुई।




हल्द्वानी में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस की ओर से निकाली जा रही यात्राओं पर सवाल पूछा था। इसके जवाब में सीएम धामी ने कहा था कि कांग्रेस को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए, जबकि उसके नेता खुद जेनी प्रकरण में शामिल रहे हैं।




मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भी पलटवार किया था और कई बयान जारी किए थे।




इसके बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा, लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के हालिया बयान ने एक बार फिर जेनी प्रकरण को चर्चा में ला दिया। इसके जवाब में हरक सिंह रावत ने महेंद्र भट्ट का डीएनए टेस्ट कराने तक की बात कह दी थी।




अब जेनी के सामने आकर आरोप लगाने और दोबारा जांच की मांग करने के बाद यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में फिर सुर्खियों में है।

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