पटना: 'मन में कभी-कभी यह सवाल भी उठता है कि क्या मैं अपने ही राजनीतिक परिवार (NDA) के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेला पड़ गया था? यह मेरी व्यक्तिगत पीड़ा और आत्ममंथन का विषय है। पर यकीन मानिए, मैं किसी के प्रति मन में कोई कटुता या द्वेष लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहता। समय और सत्य, दोनों खुद अपनी कहानी कहेंगे।' उपरोक्त लाइनें, जेडीयू नेता और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी का चुनाव हार चुके पार्टी के कैंडिडेट रहे अभिषेक झा के एक्स पोस्ट की है। उन्होंने रिजल्ट के बाद एक्स पर अपना दर्द साझा किया था। इन लाइनों के भीतर छिपे हुए दर्द के आईने में आप एनडीए के अंदर मचे सियासी बवाल को महसूस कर सकते हैं। क्या अभिषेक झा को एमएलसी चुनाव में एनडीए का साथ नहीं मिला? क्या जेडीयू भितरघात का शिकार हो गई?
जेडीयू तैयार करेगी विस्तृत रिपोर्ट के बाद जेडीयू के अंदर कई सवालों को लेकर खींचतान जारी है। इसके लिए पार्टी की ओर से एक बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में अब पार्टी जिलों से रिपोर्ट मंगाना शुरू कर रही है। पार्टी अध्यक्ष को संबंधित जिलाध्यक्षों से सारी रिपोर्ट मिल रही है। जेडीयू को ये पता चल रहा है कि भितरघाती कौन है। जेडीयू को ये भी पता चल रहा है कि किसने कैंडिडेट का विरोध किया। ध्यान रहे कि जेडीयू के चार प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें तीन को हार मिली और एक कैंडिडेट पार्टी के अंदर के ही नेता अनंत सिंह के विरोध के बाद भी चुनाव जीत गए।
जेडीयू की पटना में हुई बैठकजेडीयू की ओर से पटना में आयोजित बैठक के अंदर जो फैसला लिया गया, उसके मुताबिक इस बैठक में उन जिलों के जिलाध्यक्ष को खास तौर पर बुलाया गया था, जिनके जिलों में एमएलसी चुनाव था। चुनाव प्रचार के दौरान ही जेडीयू को कुछ फीडबैक मिले होंगे। लेकिन अब जिलाध्यक्षों ने बैठक में खुलकर अपनी बात रख दी है। उन्होंने बता दिया है कि असल में क्या हुआ है और पार्टी क्यों हारी है। ध्यान रहे कि जेडीयू अब उस रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसमें ये सामने आने की संभावना है कि कैंडिडेट्स को पार्टी के स्थानीय नेताओं ने साथ नहीं दिया और कुछ क्षेत्रों में एनडीए के सहयोगी दल का साथ नहीं मिला।
जेडीयू के अंदरखाने क्या चल रही चर्चा?
- एमएलसी चुनाव रिजल्ट और उसके बाद दो निर्दलीय चुनाव जीतने वाले एमएलसी का बीजेपी में शामिल होना जेडीयू को खटक रहा है। जेडीयू अंदर ही अंदर पूरे खेल का पता लगाने में जुटी है- सूत्र
- जेडीयू के अंदर मंथन जारी है। बहुत जल्द कोई बड़ा फैसला आ सकता है। यहां तक कि इसका असर संजय झा और ललन सिंह पर भी देखने को मिल सकता है। पार्टी के अंदर के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
- जेडीयू अपने जिलाध्यक्षों से रिपोर्ट मांग रही है। उसके बाद जेडीयू की ओर से इस रिपोर्ट पर एक्शन लिया जाएगा। स्थानीय नेताओं से सवाल जवाब किये जाएंगे। उसके अलावा सहयोगी दलों के भूमिका की जांच होगी।
जेडीयू के अंदर हलचल तेजजेडीयू की ओर से चारों तरफ से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर एक और मसौदा बनाया जाएगा। उसके बाद पार्टी बड़ा कदम उठा सकती है। पार्टी ये जानकारी और रिपोर्ट जुटा रही है कि कैंडिडेट्स को किस स्तर पर और कहां समर्थन नहीं मिला। तिरहुत स्नातक क्षेत्र से जेडीयू के नेता अभिषेक झा ने खुलकर अपनी बात सोशल मीडिया पर लिख डाली थी। उसके बाद सारण शिक्षक निर्वाचन से भी इस तरह की बात सामने आई थी। अब जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा इन रिपोर्ट्स को प्रदेश नेतृत्व को सौंपकर आगे का कदम उठाने की मांग करेंगे।
चुनाव हारने के बाद क्या बोले थे अभिषेक झा?
नीतीश की पार्टी ले सकती है बड़ा फैसला- सूत्रजेडीयू के अंदरखाने से मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी दो लेवल पर रिपोर्ट तैयार करेगी। पहली रिपोर्ट जेडीयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं की होगी। जिन्होंने जिलास्तर पर कैंडिडेट्स का विरोध किया। उसके अलावा एनडीए और सहयोगी दलों की एक रिपोर्ट होगी, जिसमें बताया जाएगा कि सहयोगी दलों का रवैया कैसा रहा। उसके बाद पार्टी की अनुशासन कमेटी इसका विश्लेषण करेगी और उसके बाद एक्शन लिया जाएगा। । अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। उसके अलावा नालंदा और नवादा जिले से रिपोर्ट मंगाई जा रही है। स्थानीय नेताओं पर एक्शन लिया जाएगा।