हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित दुर्गम केदारताल ट्रैक पर बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा के पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके घर पहुंचे। गुडंबा थाना क्षेत्र के गायत्रीपुरम स्थित आवास पर सुबह करीब 10 बजे जैसे ही दोनों बहनों के शव एंबुलेंस से पहुंचे, परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में मातम छा गया। बेटियों के शव देखकर पिता श्रीनारायण वर्मा बेसुध होकर गिर पड़े और फूट-फूटकर रोने लगे।
उन्होंने भरे गले से कहा कि दोनों बेटियां सिर्फ उनकी संतान नहीं, बल्कि उनका नूर और जिगर का टुकड़ा थीं। दोनों जहां भी जाती थीं, हमेशा साथ जाती थीं और आज दुनिया से भी एक साथ रुखसत हो गईं। पिता ने बिलखते हुए कहा कि उन्हें कभी अंदेशा नहीं था कि जिंदगी में ऐसा मनहूस दिन भी देखना पड़ेगा।
मंजिल से महज 6-7 किलोमीटर दूर था कैंपमूलरूप से बाराबंकी के सराय पांडेय निवासी श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से एक वर्ष पहले रिटायर हुए थे। उन्होंने बताया कि दोनों बेटियों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का गहरा शौक था। वे भारत और नेपाल के कई दुर्गम ट्रैक सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी थीं।
26 अक्टूबर को लखनऊ से उत्तराखंड के लिए रवाना हुई थीं। 27 अक्टूबर को वे सात अन्य ट्रेकर्स और पांच सपोर्ट स्टाफ समेत कुल 12 सदस्यीय दल के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए निकली थीं। तीन दिन का यह ट्रैक 29 अक्टूबर को पूरा होना था।
दल करीब 20 से 25 किलोमीटर का कठिन रास्ता तय कर चुका था और मंजिल से महज 6 से 7 किलोमीटर की दूरी शेष थी। इसी दौरान मौसम खराब हो गया। भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण वापसी का रास्ता बंद हो गया और ट्रेकर्स रास्ते में फंस गए।
30 अक्टूबर को मांगी गई थी मदद, बुधवार को मिले शव30 अक्टूबर को दल के कुछ सदस्यों ने कच्ची ढांग के पास फंसे होने की सूचना देकर ट्रेकिंग एजेंसी से मदद मांगी थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
31 अक्टूबर को सपोर्ट टीम के चार सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि कैंप में मौजूद 12 लोगों में से आठ को एयरलिफ्ट कर लिया गया था। हालांकि, बर्फ में फंसे होने के कारण चार लोग वहीं रह गए। बुधवार सुबह तीन शव बरामद किए गए, जिनमें लखनऊ की दोनों बहनें भी शामिल थीं।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद भाई अतुल वर्मा परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि हादसे की जानकारी उन्हें ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से नहीं दी गई, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के माध्यम से इस अनहोनी का पता चला।
एक बेटी गुरुग्राम में नौकरी करती थी, दूसरी NIFT से पासआउट ग्राफिक डिजाइनरपरिजनों ने बताया कि दोनों बहनें अपने 25 वर्षीय भाई अतुल से बड़ी थीं और बेहद प्रतिभाशाली व आत्मनिर्भर थीं।
बड़ी बेटी वर्तिका गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में काम करती थी। उसकी शादी के लिए रिश्ते भी देखे जा रहे थे। वहीं छोटी बेटी दीपिका ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से डिग्री हासिल की थी। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर वर्क फ्रॉम होम कर रही थी।
दोनों बहनें करीब दो महीने पहले ही फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग पूरी कर लौटी थीं। पिछले साल उन्होंने अपने भाई के साथ केदारकांठा ट्रैक भी किया था।
ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर परिजनों ने उठाए सवालपरिजनों ने ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि मौसम की गंभीर चेतावनी के बावजूद एजेंसी ने दल को आगे बढ़ने की अनुमति दी। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें समय पर हादसे की जानकारी नहीं दी गई, जिससे वे तत्काल मदद पहुंचाने की कोशिश नहीं कर सके।
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