Compact SUV Growth: हमारे देश में अब ग्राहकों की पसंद बदल रही है और अब कार खरीदने में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. क्योंकि ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीय कार खरीदार अब केवल नार्मल कारों तक सीमित न रहकर अधिक फीचर्स, बड़े साइज और बेहतर ड्राइविंग अनुभव वाली गाड़ियों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.
जिसके चलते कॉम्पैक्ट और सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट की मांग में सबसे तेज उछाल देखा गया है. इसके साथ ही पारंपरिक पेट्रोल कारों की जगह अब सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बहुत तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है. चलिए इस खबर में जानते हैं कि ऑटो बाजार में कैसे बदल रहा है गाड़ी खरीदने का ट्रेंड.
जानकारी के लिए बता दें कि कार खरीदारों के बीच SUV का क्रेज लगातार सिर चढ़कर बोल रहा है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री 30.7 प्रतिशत बढ़कर 14 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई.
इस तेजी में सब-कॉम्पैक्ट और कॉम्पैक्ट एसयूवी ने बेहद ज्यादा बढ़ोतरी की है. जिनकी बिक्री में 31 प्रतिशत और 53.1 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई. बड़ा केबिन, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और एग्रेसिव डिजाइन के कारण हैचबैक कारों के ग्राहक भी अब एसयूवी की ओर रुख कर रहे हैं.
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आपको बता दें कि पारंपरिक पेट्रोल वाहनों के रजिस्ट्रेशन में गिरावट देखने को मिल रही है. जबकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों का मार्केट शेयर लगातार बढ़ रहा है. घटती रनिंग कॉस्ट और सीएनजी स्टेशनों के बेहतर नेटवर्क के कारण लोग सीएनजी विकल्पों को तेजी से चुन रहे हैं.
वहीं इसके अलावा होम चार्जिंग और लंबी रेंज देने वाली नई इलेक्ट्रिक कारों के बाजार में आने से ईवी सेगमेंट में भी 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ग्राहक अब ईंधन दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं.
जानकारी दें दे कि ग्राहकों द्वारा चुनिंदा मॉडल्स को अपग्रेड करने के चलते कारण गाड़ियों का प्राइस स्ट्रक्चर पूरी तरह से बदल गया है. अब 10 लाख से 20 लाख रुपये के बजट ब्रैकेट में सबसे ज्यादा गाड़ियां बिक रही हैं.
जबकि कार निर्माता कंपनियां भी ग्राहकों को लुभाने के लिए इस प्राइस रेंज में एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम, वेंटिलेटेड सीट्स, बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन और कनेक्टेड कार फीचर्स जैसे हाई-टेक फीचर्स स्टैंडर्ड तौर पर दे रही हैं.
जबकि त्योहारी सीजन को देखते हुए ऑटो डीलरों ने अपने स्टॉक में बढ़ोतरी की थी. जिससे डीलरों का इन्वेंट्री लेवल बढ़कर 43-45 दिनों तक पहुंच गया था. हालांकि त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी रिटेल मांग के कारण इन गाड़ियों की डिलीवरी में भी तेजी आई है.
जबकि जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में सीएनजी और ईवी की बढ़ती हिस्सेदारी भारत के ऑटोमोबाइल बाजार को अधिक विविधतापूर्ण और ग्रीन मोबिलिटी बनाने में मदद करेगी.
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