डॉ. आशीष कुमार त्रिपाठी, अमेठी: गेहूं की बुवाई का समय नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के लिए बीज उत्पादन करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बार किसानों को फाउंडेशन बीज अनुदान पर नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल जहां किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया गया था, वहीं इस बार उन्हें पूरी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और रायबरेली जिलों को मिलाकर बीज विकास निगम का एकमात्र बीज विधायन संयंत्र अमेठी जिले के भेटुवा विकासखंड के शारदन में स्थित है। यहां पंजीकृत किसान फाउंडेशन (आधारीय) बीज खरीदकर उससे फसल का उत्पादन करते हैं और तैयार फसल को वापस बीज विधायन संयंत्र के माध्यम से निगम को बेचते हैं।
प्रमाणित बीज के रूप में बेचता है कृषि विभाग
निगम इस फसल को शोधित करके कृषि विभाग को 'प्रमाणित बीज' (Certified Seed) के रूप में बेचता है, जो आगे सरकारी कृषि केंद्रों और प्राइवेट एग्रिजंक्शन के जरिए गेहूं की बुवाई के समय आम किसानों तक पहुंचते हैं। खास बात यह है कि निगम अपने पंजीकृत किसानों से उनकी फसल, बाजार के सरकारी मूल्य से ऊंची कीमत पर खरीदता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है।
इस बार क्या आ रही है परेशानी?
शारदन स्थित बीज विधायन संयंत्र में कुल 409 किसान पंजीकृत हैं। केंद्र प्रभारी अनिल सिंह के अनुसार, इस साल 571 क्विंटल बीज बिक्री का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी निर्धारित कीमत 5,108 रुपये प्रति क्विंटल है। पिछले वर्ष करीब 300 क्विंटल फाउंडेशन बीज अनुदान पर बेचा गया था, लेकिन इस बार शासन से अनुदान का कोई आदेश न मिलने के कारण बीज पूरी कीमत पर बेचा जा रहा है।
निगम का पक्ष
निगम मुख्यालय लखनऊ के कार्यालय सचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि इस साल शासन से अनुदान पर बीज बिक्री का आदेश नहीं मिला है, जिसके कारण किसानों को छूट नहीं मिल पा रही है। यदि 50% अनुदान मिल जाता, तो यही बीज किसानों को 5,108 रुपये के बजाय आधी कीमत में मिल सकता था।
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