गिरिडीहः झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और बरकरार रखने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच आदिवासियों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय जेएमएम विधायक ने गिरिडीह में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज एसआईआर का कागज लाकर कहा जाता है कि नाम और पहचान गलत है। लेकिन हकीकत है कि जब धरती में कागज का जन्म भी नहीं हुआ था, आविष्कार भी नहीं हुआ था, उससे भी पुराना इतिहास आदिवासियों का है। आदिवासी समाज के लोग पौराणिक समय से आए हुए लोग हैं। आदिवासी समाज को किसी के कागज की जरूरत नहीं है। एसआईआर में कहा जा रहा कि लोगों के पास सही कागज या सर्टिफिकेट नहीं है। नाम में गड़बड़ी है, तो इसकी गलती किसकी हुई।
वोटर लिस्ट के नाम में गलती के लिए जिम्मेदार कौन कल्पना सोरेन ने कहा कि यदि किसी का नाम मरांडी की जगह वोटर लिस्ट में मर्डी लिखा गया, तो उसे जाएगा। लेकिन अगर गलत तरीके से किसी का नाम काटने की कोशिश होगी, तो इसका विरोध किया जाएगा। इसके खिलाफ क्रांति की आवाज बुलंद होगी। इसके लिए सभी को एकजुट रहने की जरूरत है, क्योंकि यदि हाथ की पांचों उंगलियां एक साथ नहीं होगी, तो मुश्किल होगी। एक उंगली में इतना दम नहीं होता कि वो पर चीज को अकेले संभाल सके। उन्होंने कहा कि पहली बार वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने पर उस व्यक्ति ने खुद गलती नहीं की होगी। उसने खुद नहीं सोचा होगा कि एसआईआर में उसका नाम कट जाएगा।
जल, जंगल और जमीन आदिवासियों का शृंगार, सम्मान और अभिमानजेएमएम विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि किया था। क्योंकि आदिवासियों के लिए जल, जंगल और जमीन ही उनका शृंगार, सम्मान और अभिमान था। यदि कोई आदिवासियों से उनकी जमीन छीनने की कोशिश करेगा, तो पहले गला काट कर ले जाना होगा, खून गिरेगा तो इसी जमीन पर गिरेगा, क्योंकि ये धरती मेरी है।
उन्होंने कहा कि ये लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक लोगों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता। आदिवासी समाज को अपने हक और अधिकार को समझने की जरूरत है।
Contact to : xlf550402@gmail.com
Copyright © boyuanhulian 2020 - 2023. All Right Reserved.