सुनील मिश्रा,बदायूं: बदायूं के जिस आंगन में पांच साल के इंतजार के बाद एक साथ चार किलकारियां गूंजी थीं, वहां अब सिसकियों का शोर है। जिस मां ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर परिवार को खुशियों का अनमोल तोहफा दिया, वही मां अगले दिन अपने मासूमों को छोड़कर हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गई। जन्म के कुछ ही देर बाद एक नवजात बच्ची की भी सांसें थम गईं।
एक साथ चार बच्चों के जन्म से शुरू हुई खुशियों की कहानी महज 24 घंटे में ऐसी त्रासदी में बदल गई, जिसने पूरे गांव को झकझोर दिया। तीन नवजात अस्पताल में भर्ती हैं। मां के आंचल से महरूम इन मासूमों के भविष्य को लेकर परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है।
पांच साल की मन्नतें, एक साथ चार खुशियांमूसाझाग थाना क्षेत्र के करौलिया गांव निवासी रामबाबू की शादी करीब पांच वर्ष पहले टिकरा गांव की एकता सागर से हुई थी। शादी के बाद से दंपती संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे थे। करीब दो वर्ष पहले एकता ने ऑपरेशन से एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन वह भी जिंदगी की जंग हार गई। इसके बाद परिवार की उम्मीदें एक बार फिर मातृत्व की खुशियों पर टिक गईं।
ऑपरेशन थिएटर से आई चार किलकारियांमंगलवार सुबह एकता को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे शहर के सुधीर नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। जांच में गर्भ में चार बच्चे होने की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। ऑपरेशन के बाद चार नवजातों का जन्म हुआ। परिवार में खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन एक बच्ची बेहद कमजोर थी और कुछ ही देर बाद उसकी सांसें थम गईं। तीन नवजातों को बेहतर उपचार और निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बरेली में जिंदगी की आखिरी जंगशुरुआत में एकता की हालत ठीक बताई गई, लेकिन मंगलवार शाम अचानक ब्लीडिंग और सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उसे बरेली के निजी अस्पताल ले गए, जहां आईसीयू में उपचार शुरू हुआ। पूरी रात जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष चलता रहा, लेकिन बुधवार सुबह करीब छह बजे एकता ने अंतिम सांस ले ली।
परिवार की आंखों में आंसूएक साथ चार बच्चों के जन्म से जिस घर में खुशियों का नया अध्याय शुरू हुआ था, वहां अब दो मौतों ने सब कुछ बदल दिया है। तीन नवजात अस्पताल में भर्ती हैं। मां के साए से महरूम इन मासूमों के पालन-पोषण की चिंता परिवार को भीतर तक तोड़ रही है।
करौलिया गांव में यह घटना हर आंख नम कर रही है। एक परिवार को एक साथ चार खुशियां मिलीं, लेकिन नियति ने उनमें से दो को छीन लिया। अब परिवार की सारी उम्मीदें अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे तीन मासूमों पर टिकी हैं।
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