पटनाः बिहार के राजनीतिक परिवारों में कई ऐसी शादियां हुई हैं जो शाही अंदाज और शानो शौकत के लिए चर्चा में रहीं हैं। इनमें से एक शादी हुई थी 10 दिसम्बर 1999 को। इस दिन पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की प्रथम पुत्री मीसा भारती का विवाह हुआ था। राजनीतिक रुतबे के हिसाब से यह शादी बहुत भव्य और आकर्षक थी। दिल खोल कर खर्च किया गया था। खर्च और महंगे उपहारों की मीडिया में इतनी चर्चा हुई कि शादी के पांच दिन बाद ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने लालू परिवार को नोटिस भेज दिया था। खर्चीली शादी का यह मामला चार साल तक आयकर विभाग में चला। लंबी सुनवाई के बाद 2003 में आयकर विभाग ने लालू परिवार को इस मामले से मुक्त कर दिया था।




10 दिसम्बर 1999 को हुई थी भव्य शादी10 दिसंबर 1999 को की शादी, कम्प्यूटर इंजीनियर शैलेश कुमार के साथ हुई थी। शादी का आयोजन मुख्यमंत्री आवास, 1 अणे मार्ग में किया गया था। एक विशाल पंडाल लगाने के लिए आसपास के तीन बंगलों को जोड़ दिया गया था। पंडाल और स्टेज को सजाने के लिए कोलकाता से फूल मंगाये गये थे। विवाह में 10 हजार लोगों को आमंत्रित किया था।




शादी में बड़ी-बड़ी हस्तियों के आने की खबरइस बीच मीडिया में खबर छप गयी कि इस शादी में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार, फिल्म निर्देशक महेश भट्ट, फिल्म अभिनेत्री सायरा बानो, शबाना आजमी जैसी सम्मानित हस्तियों को निमंत्रण पत्र भेजा गया है। इसलिए पूरे राज्य के लोगों को इस शादी को लेकर बेहद उत्सुकता हो गयी। राजद कार्यकर्ताओं में पहले से इस शादी को लेकर उत्साह था। कहा जाता है कि इसकी वजह से विवाह समारोह में शामिल होने वाले लोगों की संख्या करीब 30 हजार पहुंच गयी थी।




महंगे उपहारों की चर्चा, 125 नेताओं को IT का नोटिसइस शाही की मीडिया में खूब चर्चा हुई। इन खबरों के बाद आयकर विभाग हरकत में आ गया। शादी के पांच दिन बाद यानी 15 दिसम्बर को आयकर विभाग ने इस शादी में तथाकथित बेहिसाब खर्च को लेकर लालू परिवार को नोटिस भेज दिया। सवाल पूछा गया कि क्या खर्च और उसके श्रोत को क्या आयकर रिटर्न में दिखाया गया है? लालू यादव के समधी को भी इस मामले में नोटिस भेजा गया था। लालू यादव ने अपने आयकर रिटर्न में दावा किया थे कि उपहार उनके राजनीतिक सहयोगियों, मेहमानों और कार्यकर्ताओं ने दिये थे। तब आयकर विभाग ने 125 राजनेताओं को नोटिस जारी कर पूछा कि क्या उन्होंने राजद प्रमुख के दावे के मुताबिक महंगे उपहार दिये हैं?




तथाकथित महंगे उपहार देने वाले नेताओं को मुश्किलें बढ़ींआयकर का नोटिस मिलने के बाद इन 125 नेताओं की परेशानी बढ़ गयी। इनमें कई राबड़ी सरकार के मंत्री ही थे। अगर वे उपहार देने से इंकार करते तो सारी जवाबदेही पर आ जाती। अगर उपहार देना स्वीकार करते तो उन्हें साबित करना पड़ता इसे कहां से और कैसे खरीदा। खरीदारी का पक्का बिल भी देना पड़ता। उन्हें यह भी बताना पड़ता की उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में इन उपहारों का जिक्र किया है या नहीं। अगर नहीं किया तो इनकम टैक्स का मामला उन पर बन जाता। उस समय स्थिति ऐसी थी कि राजद का कोई नेता महंगे उपहारों के लेकर कुछ नहीं बोलता था।




लालू परिवार ने कहा, कुल 8 लाख खर्च, 4 लाख कार्यकर्ताओं केइसके बाद लालू यादव और मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आयकर विभाग को बताया कि उनकी पुत्री मीसा भारती की शादी में 8 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इनमें 3 लाख से 4 लाख के बीच उन्होंने अपनी जेब से खर्च किये और बाकी खर्च राजद के कार्यकर्ताओं ने उठाया था। आयकर विभाग ने 2003 में लालू यादव-राबड़ी देवी के ब्योरा को सही मान लिया और अधिक खर्च के मामले में उन्हें मुक्त कर दिया था।

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