बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं तो RBI की ये खबर आपके काम की है. भारतीय रिजर्व बैंक ने एक तरफ ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए की नकदी भी डाली है. पहली नजर में ये दोनों फैसले एक-दूसरे के उलट लग सकते हैं. आखिर जब कर्ज महंगा किया जा रहा है तो बैंकों को इतना पैसा क्यों दिया जा रहा है?
इसका जवाब जानने के लिए आपको ब्याज दर और बैंकिंग सिस्टम में नकदी के फर्क को जानना जरूरी है. RBI वैसे तो ब्याज दर बढ़ाकर कर्ज पर नियंत्रण रखना चाहता है, लेकिन साथ ही चाहता है कि बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए पैसा भी भरपूर हो.
RBI ने क्यों दिया बैंकों को पैसा?
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद रेपो रेट 5.50 फीसदी हो गया. यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी बताई गई है.
इसके बाद RBI ने बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए की नकदी डालने के लिए रेपो नीलामी की. इसका मकसद बैंकों को कम समय के लिए जरूरी पैसा उपलब्ध कराना है, ताकि बाजार में नकदी की कमी के कारण कर्ज देना प्रभावित न हो.
ब्याज दर और नकदी में क्या है फर्क?
आसान भाषा में समझें तो रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए पैसा जुटाने की लागत बढ़ सकती है. इसका असर आगे चलकर ग्राहकों के लोन की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है. वहीं, बैंकिंग सिस्टम में नकदी का मतलब है कि बैंकों के पास रोजमर्रा के काम और ग्राहकों को कर्ज देने के लिए कितना पैसा उपलब्ध है. RBI जब नकदी डालता है, तो बैंकों को थोड़े समय के लिए फंड की कमी से राहत मिल सकती है.
यानी ब्याज दर बढ़ाने का मतलब कर्ज की कीमत बढ़ाना है, जबकि नकदी डालने का मकसद बैंकों के पास पैसों की उपलब्धता बनाए रखना है. दोनों फैसले अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
क्या महंगे होंगे होम और कार लोन?
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर पड़ सकता है. ऐसे लोन की ब्याज दर समय-समय पर बदलती है. अगर आपका होम लोन या कार लोन रेपो रेट से जुड़ा है, तो अगली रीसेट तारीख पर ब्याज दर बढ़ सकती है. हालांकि, इसका असर हर ग्राहक पर एक साथ या एक जैसा नहीं होगा. लोन की शर्तें, बैंक की दरें और रीसेट का समय तय करेगा कि EMI कब और कितनी बदलेगी. फिक्स्ड रेट वाले लोन पर आम तौर पर तुरंत असर नहीं पड़ता है.
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