नवंबर का महीना वित्तीय मामलों में कई अहम बदलाव लेकर आया है. इन बदलावों का असर आम लोगों की बचत, टैक्स से जुड़ी जिम्मेदारियों और निवेश की योजनाओं पर पड़ सकता है.


पेंशन पाने वाले बुजुर्गों, टैक्सपेयर्स और शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा. ऐसे में महीने की शुरुआत के साथ ही इन बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि किसी तरह की परेशानी या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.


पेंशनर्स को 30 नवंबर तक जमा करना होगा लाइफ सर्टिफिकेट


80 साल से कम उम्र के सरकारी पेंशनर्स को 1 से 30 नवंबर के बीच अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होगा. वहीं 80 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है. प्रमाणपत्र बैंक जाकर, जीवन प्रमाण ऐप के जरिए या उपलब्ध डोरस्टेप बैंकिंग सेवा से जमा किया जा सकता है. इसे समय पर जमा नहीं करने पर पेंशन मिलने में रुकावट आ सकती है.


म्यूचुअल फंड निवेश के नियमों में बदलाव


1 नवंबर से म्यूचुअल फंड कंपनियों की वेबसाइट और ऐप पर डायरेक्ट पलान को डिफॉल्ट विकल्प बनाया गया है. इसका उद्देश्य निवेशकों को निवेश की लागत समझने और कम खर्च वाले विकल्प चुनने में मदद करना है.  डायरेक्ट पलान में निवेशक बिना किसी बिचौलिए के सीधे फंड हाउस से यूनिट खरीदते हैं, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर कम होता है. वहीं रेगयुलर पलान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन भी शामिल रहता है. हालांकि, पुराने निवेश और SIP अपने आप  डायरेक्ट पलान में नहीं बदलेंगे.


PNB क्रेडिट कार्ड के चार्ज में बदलाव


पंजाब नेशनल बैंक ने अपने Visa और RuPay क्रेडिट कार्ड पर कुछ शुल्क संशोधित किए हैं. 50 हजार रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर 1 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 2 हजार रुपये प्रति ट्रांजैक्शन है. नकद निकासी पर PNB ATM से 2.5 प्रतिशत या 400 रुपये और दूसरे घरेलू ATM से 2.5 प्रतिशत या 500 रुपये, जो भी अधिक हो, शुल्क लगेगा.


IndusInd बैंक और GST से जुड़े बदलाव


IndusInd बैंक के कुछ चुनिंदा बचत खातों में अपर्याप्त बैलेंस के कारण फेल POS या ATM ट्रांजैक्शन पर 25 रुपये और कुछ गैर-वित्तीय कारणों से चेक लौटने पर 50 रुपये शुल्क लगेगा. इन पर GST अलग से लागू होगा.


इसके अलावा 1 नवंबर से GST नियमों में भी बदलाव हुए हैं. इनमें बिक्री के बाद मिलने वाली छूट, क्रेडिट नोट और रिफंड से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. इनका असर मुख्य रूप से GST रजिस्टर्ड कारोबारियों पर पड़ेगा. उन्हें अपने बिलिंग और अकाउंटिंग सिस्टम की समीक्षा करनी होगी. इसलिए नवंबर में पेंशनर्स, निवेशकों, बैंक ग्राहकों और कारोबारियों को अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों और लागू शुल्कों की जानकारी जरूर रखनी चाहिए.


टैक्स रिटर्न भरने की बढ़ी समयसीमा


साल 2026-27 के लिए कुछ ऑडिट वाले कारोबारियों, पेशेवरों और फर्मों को ITR जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है. इनके लिए आखिरी तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी गई है. हालांकि, यह छूट सभी टैक्सपेयर्स के लिए नहीं है. वेतनभोगी लोगों को इसे सामान्य ITR की तारीख में बदलाव नहीं समझना चाहिए.


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