भारत में पेट्रोल और डीजल के विकल्पों को लेकर सरकार लगातार नए प्रयोग कर रही है. अब डीजल में जैव ईंधन मिलाने की दिशा में एक और कदम उठाया जा रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस संबंध में अहम जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की संभावना पर परीक्षण किए जा रहे हैं.
गडकरी के मुताबिक, भारत हर साल जीवाश्म ईंधन के आयात पर करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. सरकार चाहती है कि घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़े, जिससे आयात पर होने वाला खर्च कम किया जा सके. जैव ईंधन को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा है.
डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने का परीक्षण
नितिन गडकरी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने को लेकर फिलहाल जांच चल रही है. इन परीक्षणों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस मिश्रण का इस्तेमाल कितना प्रभावी और उपयोगी साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि परीक्षण के नतीजों के आधार पर आगे का फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करेगा.
सरकार इस योजना के जरिए देश में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है. इसके साथ ही कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है.
2029 से लागू हो सकते हैं BS7 नियम
गडकरी ने आगामी भारत स्टेज-7 (BS7) उत्सर्जन नियमों पर भी जानकारी दी. सड़क परिवहन मंत्रालय ने इन्हें 2029 से तीन चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, वाहन उद्योग का संगठन SIAM चाहता है कि इन नियमों को 2032 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए. नए नियमों के तहत वाहनों से निकलने वाले धुएं के अलावा टायर और ब्रेक से पैदा होने वाले प्रदूषण पर भी सख्ती की जाएगी. इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है.
E20 पेट्रोल को लेकर भी हुई चर्चा
डीजल में नए ईंधन के परीक्षण ऐसे समय हो रहे हैं, जब पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने वाले E20 कार्यक्रम को लेकर वाहन चालकों की ओर से सवाल उठाए गए हैं. कुछ लोगों ने माइलेज कम होने और इंजन से जुड़ी परेशानियों की शिकायत की है.
हालांकि, गडकरी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन के खराब होने की बात सामने नहीं आई है. उन्होंने बताया कि मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई जैसी कंपनियों ने E20 के अनुकूल वाहन मॉडल तैयार किए हैं.
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