विशाल सिंह, गोंडा: यूपी के गोंडा और बलरामपुर जिले में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में 42 ग्रामीण डाक सेवकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इसके बाद डाक विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए 22 सेवकों की सेवा समाप्त कर दी है, जबकि 16 का चयन रद्द कर दिया गया है। इन सभी ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर भर्ती में अपनी दावेदारी की थी।
दरअसल डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। मेरिट के आधार पर चयन के बाद जब दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो कई प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले। विभाग ने जब संबंधित बोर्ड और स्कूलों से इन प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया तो 42 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी निकले।
चार मामलों में अभी चल रही जांच
जांच रिपोर्ट सामने आते ही विभाग ने एक्शन लेना शुरू कर दिया। गोंडा और बलरामपुर में जो 22 ग्रामीण डाक सेवक पहले से नौकरी कर रहे थे, उन्हें तत्काल बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा 16 अभ्यर्थी ऐसे थे जिनका चयन हो चुका था लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई थी, उनका चयन रद्द कर दिया गया। शेष 4 मामलों में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
10वीं की मार्कशीट में किया फर्जीवाड़ा
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर मामलों में 10वीं की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा किया गया था। ज्यादा नंबर दिखाने के लिए फर्जी मार्कशीट बनवाई गई थी ताकि मेरिट में ऊपर आ सकें। सत्यापन में बोर्ड ने ऐसे प्रमाण पत्रों को फर्जी करार दिया।
फिर से 22 पदों पर निकाली जाएगी भर्ती
इस कार्रवाई के बाद डाक विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने अब आगे से भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन को और सख्त करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी प्रमाण पत्र लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल दोनों जिलों में 22 पद दोबारा खाली हो गए हैं। इन पदों को भरने के लिए विभाग जल्द ही नई प्रक्रिया शुरू करेगा। इस कार्रवाई के बाद सही प्रमाण पत्र वाले अभ्यर्थियों को मौका मिलने की उम्मीद है।
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