वॉशिंगटन: दुनियाभर में बीते कुछ दशकों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जैसे-जैसे वाहन बढ़े हैं तो पुराने टायरों के बड़े ढेर भी शहरों में जमा हुए हैं। कार, गाड़ी और दूसरे वाहनों के पुराने बेकार टायर कचरा प्रबंधन की समस्या पैदा करते हैं। ऐसे में वैज्ञानिक इनके इस्तेमाल (रीयूज) के विकल्प खोजते रहे हैं। साल 1990 में अमेरिका के ओरेगन में हाईवे मरम्मत परियोजना के दौरान इंजीनियरों ने लाखों टायरों के इस्तेमाल का एक तरीका निकाला, जो काफी हद तक कामयाब भी रहा।
अमेरिकी स्टेट ओरेगन में सड़क बनाना मुश्किल हो रहा था क्योंकि किनारे ढलान थी। इस पर मिट्टी डाली जाती तो पहले से खिसक रही जमीन पर बोझ बढ़ जाता था। ऐसे में ओरेगन डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन (ODOT) ने मिट्टी के भारी तटबंध के एक हिस्से को पुराने टायरों से बदल दिया। टायर हल्के होते हैं, जिससे ढलान पर पड़ने वाला बोझ कम हो गया।
हाईवे पर टायरों पर इस्तेमालयह प्रयोग 1990 में यूएस-42 (कूज बे-रोजबर्ग हाईवे) पर किया गया था। इसे ODOT की इंजीनियरिंग रिपोर्ट में 'ओरेगन स्टेट रोड 35' कहा गया है। फेडरल हाईवे एडमिनिस्ट्रेशन ने बाद में इसे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) को ठीक करने की परियोजना में कटे हुए टायरों के अब तक के सबसे बड़े इस्तेमाल के रूप में दर्ज किया गया।
इस काम के लिए 5,800 टन कटे हुए टायरों की जरूरत थी, जो करीब 580,000 टायर होते हैं। ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च रिकॉर्ड में रिचर्ड अप्टन और जॉर्ज माचन की 1993 की रिसर्च अनुसार, चार आपूर्तिकर्ताओं ने 150 से 275 मील दूर से ट्रकों के जरिए पहुंचाया। ये 100 ट्रकों में लाए गए। हर एक ट्रक पर 28 टन सामग्री थी।
कैसे बिछाए गए टायरइन टायरों को तीन-तीन फुट की परतों में बिछाया फिर हर परत को दबाया गया। ओरेगन के रीसाइक्लिंग प्रोग्राम ने सामग्री की लागत को घटाकर 10 डॉलर प्रति टन कर दिया। टुकड़ों में कटे टायरों की लागत 30 डॉलर प्रति टन थी। इन्हें बिछाने और दबाने में 8.33 डॉलर प्रति टन का खर्च आया। ऐसे में ये पुराने टायरों के इस्तेमाल का व्यावहारिक विकल्प बन गया।
इसके निर्माण के बाद टायरों की इस परत के ऊपर और किनारों की ढलानों पर तीन फुट मोटी मिट्टी की एक परत बिछाई गई। इसके ऊपर सड़क की सतह बनाई गई और 8 इंच डामर की परत के नीचे 23 इंच मोटे एग्रीगेट (पत्थर-गिट्टी) का आधार रखा गया। टायरों से बने इस तटबंध (एम्बैंकमेंट) का सबसे मोटा हिस्सा तकरीबन 12.5 फुट का था।
ODOT ने स्लोप इनक्लिनोमीटर, पीजोमीटर, सेटलमेंट प्लेट और सर्वे हब की मदद से ढांचे की निगरानी की। 1993 पाया गया कि सड़क की सतह का शुरुआती झुकाव (डिफ्लेक्शन), मिट्टी के तटबंध पर बनने वाली सड़क की तुलना में दोगुना था। FHWA ने इसे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) को ठीक करने वाला अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना।
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