गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि प्रस्तावित दिल्ली-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन बनना तय हो गया है। लेकिन इस प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा 'चिकन्स नेक' कॉरिडोर है। यहां से बुलेट ट्रेन को निकालने के लिए कई टेक्निकल समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में बुलेट ट्रेन का रास्ता जमीन के नीचे या ऊंचे ट्रैक (एलिवेटेड ट्रैक) से निकालना पड़ सकता है। यह कॉरिडोर रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है और पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाला एक संकरा रास्ता है।
इस प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल लाइन को मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसका अंतिम रूट (अलाइनमेंट) और इंजीनियरिंग संबंधी जरूरतें अभी तय की जानी बाकी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि रेलवे अधिकारियों ने बाद में उस संकरे हिस्से से जुड़ी मुश्किलों के बारे में समझाया, जहां मौजूदा बुनियादी ढांचे की वजह से एक और रेलवे लाइन बिछाने के लिए बहुत कम जगह बची है।
'सर्वे और तकनीकी आकलन की जरूरत'हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि विस्तार को मंजूरी मिल गई है, लेकिन परियोजना की डिटेल फाइनल करने से पहले सर्वे और तकनीकी आकलन की जरूरत होगी। अब सर्वे करना होगा और समानांतर लाइन बिछानी होगी। इसमें कई चरण शामिल हैं। मुझे लगता है कि सबसे अच्छी खबर यह है कि गुवाहाटी को नक्शे में शामिल कर लिया गया है, लेकिन अभी बाकी डिटेल्स पर काम होना बाकी है।
अश्विनी वैष्णव से मिलेंगे हिमंत बिस्व सरमाहिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि चूंकि यह (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) केवल 22 किमी लंबा है, जहां पहले से ही सड़कें और रेलवे ट्रैक मौजूद हैं, और कुछ हिस्सों में तो यह सिर्फ 16 किमी ही है। इसलिए, इसे या तो जमीन के नीचे या फिर जमीन के ऊपर बनाना होगा। इन सभी डिटेल्स पर अभी काम किया जाना है। सीएम ने कहा कि वह अपनी अगली दिल्ली यात्रा के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलेंगे और इस प्रॉजेक्ट की तकनीकी अड़चनों पर चर्चा करेंगे।
हिमंत बिस्व सरमा बोले- अभी लगेगा समयहिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि दिल्ली से गुवाहाटी तक के रूट पर नई लाइन बनाने में समय लगेगा। इससे पहले सोमवार को, शर्मा ने उत्तरी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को पूर्वोत्तर तक बढ़ाने पर विचार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री वैष्णव को धन्यवाद दिया। उन्होंने इस प्रस्ताव को पूर्वी भारत के लिए एक अहम मील का पत्थर बताया और कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से असम में व्यापार, उद्योगों और आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
तीन गुना हो सकता है बजटकेंद्र सरकार ने उत्तरी कॉरिडोर को गुवाहाटी तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिससे गुवाहाटी और नई दिल्ली के बीच यात्रा का समय घटकर आठ घंटे से भी कम हो सकता है। हिमंत बिस्व शर्मा ने बताया कि केंद्र ने शुरुआत में संकेत दिया था कि बुलेट ट्रेन नेटवर्क को सिलीगुड़ी से आगे गुवाहाटी तक ले जाना शायद संभव न हो। लेकिन अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री से मेरी मुलाकात के बाद, अब वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि यह गुवाहाटी तक आएगी। हालांकि, हमें इस तकनीक के बारे में और अधिक जानने की जरूरत है। इस फैसले को बेहद उल्लेखनीय, साहसिक और हिम्मत भरा बताते हुए, शर्मा ने इसमें आने वाले अतिरिक्त खर्चों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत पैसा लगेगा। निवेश (सामान्य मामलों की तुलना में) दोगुना या तिगुना हो सकता है।
क्या है चिकन नेक और क्यों बुलेट ट्रेन है चैलेंजसिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर 'चिकन्स नेक' (मुर्गे की गर्दन) के नाम से जाना जाता है, जमीन का एक संकरा हिस्सा है जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यह कॉरिडोर लगभग 22 किमी चौड़ा है, लेकिन कुछ जगहों पर यह सिमटकर सिर्फ 16 किमी रह जाता है। चूंकि यहां से पहले ही हाईवे और मौजूदा रेलवे लाइनें गुजर रही हैं, इसलिए एक अलग हाई-स्पीड रेल ट्रैक बनाने के लिए बहुत सोच-समझकर योजना बनाने की जरूरत होगी।
अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क के प्रस्तावित 'नॉर्थ कॉरिडोर' (उत्तरी गलियारे) को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्तावित रूट दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ेगा और फिर आगे गुवाहाटी तक जाएगा।