पटना: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह (Lalan Singh) जो कभी पार्टी के शीर्ष नेताओं को सांगठनिक नियम का पालन करने का हवाला दे कर उनकी बोलती बंद करा देते थे, आज खुद अपने लिए आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। सांगठनिक नियमों की इस अनदेखी का सामना केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को पिछले दिनों अपने ही क्षेत्र में करना पड़ा। और यह काम कोई और नहीं, बल्कि जिनके कंधों पर संगठन और उसके अनुशासन की जिम्मेदारी है, वही ऐसा कर रहे हैं। यानि जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा। क्या हुआ और कैसे हुआ ? जानते हैं....






फरक्का संधि के बहाने तोड़ा अनुशासनजदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा (JDU Sanjay Jha) ने लखीसराय में 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया था। पर इस आयोजन में मुंगेर के सांसद, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को दूर रखा। अब इसकी अंदरूनी वजह क्या है, यह तो जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ही जानें, लेकिन लखीसराय में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के समर्थकों ने इसे अच्छे नजरिए से नहीं लिया। उन्हें लगा कि जदयू के भीतर जो गुटबाजी चल रही है, उसी के परिप्रेक्ष्य में ललन सिंह को साइड लाइन करने की तैयारी चल रही है। हालांकि स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया के हवाले से पत्रकारों ने जब जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से सवाल पूछा तो संजय झा गोलमोल जवाब देते नजर आए। उन्होंने कहा कि वे केंद्रीय मंत्री हैं। उन्हें बहुत काम रहता है।




ललन सिंह ने कभी लगाई थी अशोक चौधरी की क्लासयह वाकया सितंबर 2023 का है। सितंबर 2023 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने जेडीयू की एक बैठक के बाद ललन सिंह ने मंत्री अशोक चौधरी को जमुई और बरबीघा की राजनीति में बार-बार दखलंदाजी करने से मना किया था। ललन सिंह को स्थानीय जेडीयू विधायकों से शिकायत मिली थी कि अशोक चौधरी पार्टी लाइन से अलग हटकर और स्थानीय विधायक को बिना भरोसे में लिए बरबीघा और जमुई में लगातार कार्यक्रम कर रहे हैं। तब ने अशोक चौधरी को टोका। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी देखते रह गए।




मनीष कुमार को भी पढ़ाया गया था पाठजनता दल (यूनाइटेड) के भीतर सांगठनिक स्तर पर वरिष्ठ नेताओं के बीच सामंजस्य बनाने को लेकर अक्सर इस तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। जब पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जदयू (JDU) की सदस्यता ग्रहण की और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया, तो वे बिहार में घूम-घूम कर कार्यकर्ताओं से मिलने लगे। तब उन्हें भी यह सीख दी गई कि जदयू के सांगठनिक ढांचे के अनुसार, पार्टी के किसी भी बड़े या छोटे कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संबंधित क्षेत्र के सांसद (MP) और विधायक (MLA) की मौजूदगी अनिवार्य मानी जाती है। इससे जनता और कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश जाता है।




संजय झा और ललन सिंह के बीच कुछ तो गड़बड़ है: प्रमोद दत्तवरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त का मानना है कि संजय झा और ललन सिंह के बीच कुछ तो गड़बड़ है। केंद्रीय मंत्री के गृह जनपद मुंगेर में कार्यक्रम हो, वह भी नीतीश संवाद। और उससे भी केंद्रित मंत्री ललन सिंह को साइड कर दिया जाए तो यह एक सांगठनिक रूप से अनदेखी है। इससे संदेश भी गलत जाएगा। यही वजह भी है कि मीडिया की हेडलाइन भी बनी कि ।




प्रमोद दत्त ने कहा कि सवाल तो यह भी उठा कि आखिर उस जनसभा में भीड़ लाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी? कहीं ललन सिंह को कमजोर दिखाने की यह कोशिश तो नहीं है? साधारण तौर पर यह बात जंचती नहीं कि नीतीश संवाद के लिए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के पास समय नहीं हो। यहां गुटबाजी का रंग तो दिखा।

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