भागलपुर: तिलकामांझी थाना इलाके की पुलिस ने कुछ ऐसा किया कि उसे कोर्ट से फटकार लगी है। यहां एक नाबालिग लड़की अगवा कर ली गई थी। पुलिस ने मामले में केस दर्ज किया। इसके बाद अगवा नाबालिग को बरामद भी कर लिया गया। उसे जांच के बाद बालिका गृह भेजना था। लेकिन तिलकामांझी थाने की रिपोर्ट में उसे गर्भवती नहीं बताया गया। इसके ठीक दो दिन बाद जब उसे बालिका गृह भेजा जा रहा था तो लड़की के फिर से मेडिकल जांच कराई गई। इसकी रिपोर्ट सन्न करने वाली थी। पुलिस की रिपोर्ट में गर्भवती न बताई जाने वाली नाबालिग दो दिन बाद की रिपोर्ट में प्रेग्नेंट निकली।
2 दिन 2 रिपोर्ट में, एक में नाबालिग प्रेग्नेंट नहीं और दूसरी में गर्भवतीसिर्फ 2 दिन के अंदर 2 रिपोर्ट और ऐसी गड़बड़ी देख अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। एक रिपोर्ट के अनुसार जिला सेशन जज 2 दीपक कुमार ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आखिर ये कैसी रिपोर्ट है। एक में प्रेग्नेंट नहीं और दूसरी में गर्भवती! आकिर केस की इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर कर क्या रही हैं।
अब समझिए पूरा मामलाये मामला 14 अगस्त 2026 का है। इसी दिन अगवा नाबालिग लड़की को पुलिस ने बरामद किया। इस केस की आईओ सब इंस्पेक्टर मणि कुमारी हैं। उन्होंने ही बरामदगी के बाद लड़की की मेडिकल जांच कराई। इस रिपोर्ट को कोर्ट में भी समर्पित किया गया। लेकिन इसमें पीड़िता के प्रेग्नेंट होने की कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार ही बरामद की गई नाबालिग की उम्र 17 साल 7 महीने थी।
लड़की को भेजा जा रहा था बालिका गृह, तब हुआ खुलासाउस दौरान पीड़ित की उम्र को देखते हुए अदालत ने उसे बालिका गृह भेजने का आदेश दे दिया। लेकिन बालिका गृह का एक नियम होता है। वहां किसी भी नाबालिग पीड़ित लड़की को एंट्री देने से पहले उसकी फिर से मेडिकल जांच कराई जाती है। 2 दिन बार नाबालिक की फिर से मेडकल जांच कराई गई। इसकी सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट को भी भेजी गई। लेकिन इस रिपोर्ट में लड़की के प्रेग्नेंट होने की जानकारी से पुलिस की जांच पूरी तरह से बेपर्दा हो गई।
पुलिस ने POCSO के बदले दर्ज किया था नॉर्मल किडनैपिंग केसइस गंभीर मामले में पुलिस पर शुरू से ही लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। घरवालों ने पुलिस को दी लिखित शिकायत में लड़की की उम्र 17 साल बताई थी। खुद IO मणि कुमारी ने भी अपनी रिपोर्ट में लड़की की उम्र 17 साल 7 महीने यानी नाबालिग बताई। लेकिन इस केस को एक नॉर्मल किडनैपिंग केस की धारा में दर्ज किया गया। जबकि नाबालिग के मामले में POCSO एक्ट का प्रावधान है। कोर्ट ने पुलिस ने इस प्वॉइंट पर भी सवाल पूछा। ऊपर से कोर्ट में समय पर केस डायरी तक नहीं दी गई।
SSP के दखल के बाद केस डायरी पहुंचाई गई कोर्टइसके बाद प्रॉसिक्यूशन की तरफ से को चिट्ठी लिखी गई। उसमें इन सारी बातों का जिक्र करते हुए 4 नवंबर से पहले डायरी को कोर्ट में देने की मांग की गई। इसके बाद केस में SSP ने खुद दखल दिया तो मंगलवार की देर शाम पहुंचाई गई। अब IO का कहना है कि वो सीनियर अफसरों से बात करके केस में POCSO एक्ट लगाने के लिए प्रतिवेदन देंगी।
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