नई दिल्ली: महंगे होते चावल के दाम ने सरकार की नींद उड़ा दी है। शायद यही वजह है कि अब फूड कार्पोरेशन या FCI के सरप्लस चावल से बनने वाले इथेनॉल की ऊपरी सीमा तय यानी Capping कर दी गई है। इससे पहले चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने गन्ने के रस से इथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब खबर आई है कि खुले बाजार में शत प्रतिशत टूटे हुए चावल या Broken Rice की कीमतों में भी तेज उछाल हो रहा है। इसे देखते हुए हो सकता है कि सरकार इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दे। वैसे भी इस साल अभी तक धान का उत्पादन घटने की ही खबर आई है।
चावल से इथेनॉल बनाने पर कैपिंग
पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट के लिए हर साल सरकार की तरफ से टेंडर निकाला जाता है। इसी टेंडर में इथेनॉल निर्माण और सप्लाई से जुड़ी नियम एवं शर्तों की जानकारी होती है। सरकार की तरफ से 3 नवंबर 2026 को जारी रिवाइज्ड टेंडर कंडीशंस में बताया गया है कि इस साल के शुरुआती तीन तिमाहियों में एफसीआई के सरप्लस चावल से 3.24 अरब लीटर से अधिक इथेनॉल नहीं बनाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि भारत में गन्ने के रस के अलावा चावल और मक्का का इथेनॉल बनाने में उपयोग होता है। चावल में भी अधिकतर टूटे चावल का ही उपयोग इसे बनाने में होता है।
चावल की कीमत में बढ़ोतरी
बीते कुछ महीनों के दौरान ही चावल की कीमतों में खासी बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह विदेशी बाजारों में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी, देश में धान की बुवाई के रकबे में कमी और कुछ और कारण बताए जा रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आंकड़ों को देखें तो 2 नवंबर 2026 को चावल की अखिल भारतीय औसत थोक कीमत 4380.49 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई थी। मतलब कि करीब 44 रुपये प्रति किलो। यह एक साल पहले इसी तारीख को 3747.44 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी एक साल में ही चावल के दाम करीब 17 फीसदी बढ़ गए। यह तो हुई थोक बाजार की बात। जब आप खुदरा बाजार में चावल खरीदने जाते हैं तो वहां तो स्थिति अलग ही है। वहां तो आपको थोक बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा दाम चुकाना पड़ता है।
टूटे चावल का दाम भी बढ़े
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक बीते एक पखवाड़े में टूटे चावलों की कीमतों में भी 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने 10 अक्टूबर को ब्रोकन राइस की ऑल इंडिया एवरेज प्राइस 2883 रुपये प्रति क्विंटल थी। यह दो नवंबर 2026 को बढ़ कर 3036 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में कम से कम टूटे चावलों का निर्यात तो रोक ही सकती है।
कीमतों में बढ़ोतरी पर ध्यान देना होगा
चावल निर्यातकों के संगठन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के महानिदेशक विनोद कौल का कहना है कि चावल की कीमतों में इस बढ़ोतरी पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। उनका कहना है कि इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रोकन राइस की कीमत बढ़ कर 360 डॉलर प्रति टन के ऊपर चला गया है। ऐसे में निर्यात करना पहले से ज्यादा फायदेमंद हो गया है। लेकिन सरकार भी चाहेगी कि इस तरह के चावल की घरेलू उपलब्धता बनी रहे। इसलिए हो सकता है कि इस इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दे।
क्यों बढ़ रहे हैं चावल के दाम
केंद्र सरकार के कृषि एवं कृषि कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल खरीफ मौसम के दौरान धान की फसल की बुवाई में 3.46 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। एक साल पहले इस दौरान 449.18 लाख एकड़ में धान की फसल बोई गई थी। इस साल यह क्षेत्र घट कर 433.62 लाख एकड़ रह गया है। खरीफ फसल में धान की बुवाई का रकबा घटने की मुख्य वजह मानसूनी बारिश की कमी से जोड़ा जा रहा है।