सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर) ने हवाई किराये में 700 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का आरोप लगाने वाली एक याचिका को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को सलाह दी. याचिकाकर्ता वकील ने कोर्ट को बताया कि हवाई किराये 700 प्रतिशत बढ़ गया है. इस पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हवाई यात्रा न करें.’
दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच के सामने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की थी. उन्होंने अदालत में कहा कि हवाई किराये में 700 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. इस पर बेंच ने टिप्पणी की, ‘हवाई यात्रा न करें.’
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की बेंच की तरफ से की टिप्पणी के जवाब में वकील ने कहा कि हवाई यात्रा एक जरूरी सेवा है और किराये में इस तरह की बढ़ोत्तरी संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकारों से जुड़ा है.
अदालत सोशल एक्टिविस्ट एस. लक्ष्मीनारायणन की तरफ से दाखिल एक अलग याचिका पर पहले से ही सुनवाई कर रही है, जिसमें नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की नियुक्ति, प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों की तरफ से हवाई किराये और अन्य चार्जेज में होने वाला अनिश्चित उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए नियामकीय दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है.
इस याचिका पर पिछले महीने 16 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भारतीय एविएशन सेक्टर को विनियमित करने के मकसद से 2024 के एक कानून के तहत बनाए गए नियमें को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है और इन्हें दो हफ्ते में प्रकाशित किए जाने की भी संभावना है.
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