कृष्णा कुणाल सिंह, नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर दो अधिकारियों के ट्रांसफर के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल होने वाले असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया गया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने 2 नवंबर को निलंबन का आदेश जारी किया। एक अधिकारी ने बताया कि वशिष्ठ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, मनस्वी वशिष्ठ DANIPS कैडर के 2019 बैच के एंट्री ग्रेड अधिकारी हैं। आदेश में कहा गया है कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है। ऐसे में केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 10 के तहत सक्षम प्राधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का फैसला लिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान वशिष्ठ का मुख्यालय दिल्ली रहेगा। सक्षम प्राधिकारी की पहले से अनुमति लिए बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
ट्रांसफर के फैसले के खिलाफ पुलिसकर्मियों का प्रदर्शनसोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब 150 पुलिसकर्मी जुटे थे। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। ये सभी शाहदरा थाने में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद दो पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर बहाल किया जाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। उन्होंने 'वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे' के नारे लगाए।
कमिशनर से मिला प्रतिनिधिमंडल, रखीं 5 मांगेंप्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात कर उन्हें अपनी पांच मांगें सौंपीं। इनमें शाहदरा की घटना में शामिल वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने और गुंडागर्दी करने वाले वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी शामिल है। सोमवार को पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की। उन्हें मनस्वी से बातचीत करते भी देखा गया। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों से अपने साथ मुख्यालय के अंदर चलने को कहा, लेकिन पुलिसकर्मियों ने इससे इनकार कर दिया। वे कमिश्नर के साथ 'सपर्क सभा' की मांग पर अड़े रहे।
2019 के पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन की याद आईसोमवार को हुए प्रदर्शन ने 2019 में हुए प्रदर्शन की याद दिला दी। उस समय 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी और उनके परिजन पुराने पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे थे। यह प्रदर्शन वकीलों की ओर से पुलिसवालों पर हमले की घटनाओं के बाद हुआ था।
औपचारिक याचिका दाखिल करें, सुनवाई करेंगे: HCपुलिस और वकीलों के बीच टकराव का मामला मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया। वकीलों को कथित तौर पर AK-47 से गोली मारने की धमकी देने और उन्हें 'काले कोट वाले गुंडे' कहने के मामले में हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने वकीलों को भरोसा दिया कि वे औपचारिक याचिका दाखिल करें, कोर्ट उस पर विचार करेगा।
वकीलों ने पुलिस की धमकियों का मुद्दा उठायाबेंच के सामने वकीलों के एक समूह ने पुलिस अधिकारियों की कथित धमकियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वकीलों के खिलाफ आपत्तितजनक टिप्पणियां की गईं और AK-47 से गोली मारने तक की धमकी दी गईं। वकीलों ने बेंच से कहा, 'आप हमारे मुखिया हैं। अगर आप स्वतः संज्ञान लेते हैं तो हमें तसल्ली मिलेगी।' इस पर बेंच ने कहा, 'आप एक औपचारिक याचिका दाखिल करें। हम इस पर गौर करेंगे और इसे सुनवाई के लिए लगाने का आदेश देंगे।' कोर्ट ने याचिका की कॉपी स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ को देने को भी कहा।
इस बीच, करण वीर सिंह नाम के वकील ने जनहित याचिका दाखिल कर ACP मनस्वी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। याचिका में केंद्र सरकार, कमिश्नर, स्पेशल सीपी (विजिलेंस), ACP मनस्वी और सब-इंस्पेक्टर विशाल यादव को पक्ष
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