देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण लापता हुए आठ पर्वतारोहियों की तलाश के लिए चलाए जा रहे अभियान में मंगलवार को दो लोगों के शव बरामद किए गए।




उत्तरकाशी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की संयुक्त टीम को बर्फ में दबे एक महिला और एक पुरुष के शव मिले। काफी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला जा सका। मंगलवार अपराह्न तीन बजे अभियान समाप्त करने के बाद टीम अपने शिविर में लौट आई। टीम बुधवार सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू करेगी।




मौसम में सुधार होने के बाद टीम ने मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे तलाशी अभियान दोबारा शुरू किया था। इससे पहले, सोमवार को घटनास्थल के आसपास तलाशी के दौरान एक तंबू और कुछ अन्य सामान मिला था।




29 अक्टूबर को वापस लौटना थाअधिकारियों के अनुसार, 27 अक्टूबर को सात पर्वतारोही और छह सहायक कर्मियों समेत 13 लोगों का दल गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था। इनमें से एक रसोइया बीच रास्ते से ही लौट आया था, जबकि बाकी सदस्यों को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था, लेकिन खराब मौसम, बर्फबारी और मार्ग में हिमस्खलन के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो सकी।




चार लोग सुरक्षित मिलेउन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर को ट्रैकिंग एजेंसी ने कुलियों और गाइड का एक दल भेजा था, जिसने करीब छह किलोमीटर तक रास्ता साफ किया। बाद में घटनास्थल के लिए रवाना किए गए बचाव दलों को चार लोग सुरक्षित मिले थे।




बंगाल, यूपी और उत्तराखंड के निवासी हैंबांकुरा के लापता ट्रैकर्स की पहचान तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास के रूप में हुई है। पहले चार सालबानी गांव के निवासी हैं, जबकि मनोज उसी जिले के केशरा गांव के रहने वाले हैं। अन्य तीन लापता सदस्यों में से दो उत्तर प्रदेश के लखनऊ से और एक उत्तराखंड के उत्तरकाशी से हैं। दो के जो शव मिले हैं, उनकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है।




बंगाल मुख्यमंत्री सुवेंदु ने चिंता जताईपश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लापता ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बांकुरा जिले के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) और पुलिस अधीक्षक को घटनास्थल पर उत्तराखंड एसडीआरएफ, स्थानीय जिला अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। (भाषा और आईएनएस इनपुट के साथ)

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