टोंक: राजस्थान हाईकोर्ट ने टोंक जिले के एक बहुचर्चित जमीन म्यूटेशन और अवमानना प्रकरण में फैसला हुआ है। इसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और टोंक की तत्कालीन जिला कलेक्टर टीना डाबी, देवली की तत्कालीन एसडीएम रूबी अंसार और तहसीलदार मेघना गुप्ता सहित अन्य राजस्व अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना से जुड़ी विशेष अपील को पोषणीय यानी मैनेजेबल न मानते हुए खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन ने पूरे मामले की सुनवाई की थी।




क्या था जमीन से जुड़ा पूरा विवाद?यह पूरा मामला टोंक जिले की देवली और निवाई तहसील क्षेत्र स्थित एक खाताधारी जमीन के नामांतरण (म्यूटेशन) और फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुई रजिस्ट्री से जुड़ा है। बता दें कि म्यूटेशन (नामांतरण) वो प्रक्रिया होती है, जिसमें जनीन का मालिकाना हक में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए के नाम किया जाता है। याचिकाकर्ता सुखलाल धाकड़ का आरोप था कि उनकी कृषि भूमि का कुछ भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर फर्जी म्यूटेशन करवा लिया। सुखलाल का दावा था कि राजस्व अदालत से उनके पक्ष में स्थगनादेश मिलने के बावजूद प्रशासनिक अमले ने फर्जी इंद्राज को रद्द करने और अदालती आदेशों की पालना कराने में ढिलाई बरती, जिसके चलते उन्होंने अवमानना का रास्ता अपनाया।




अधिकारियों को अवमानना केस में क्यों घसीटा गया, जानेंअदालती आदेशों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर , देवली की तत्कालीन उपखंड अधिकारी (SDM) रूबी अंसार, तहसीलदार मेघना गुप्ता और अन्य संबंधित राजस्व अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अफसरों को अवमानना का दोषी नहीं माना और याचिका खारिज कर दी थी।




हाईकोर्ट ने किस कानूनी आधार पर दी राहत, यहां समझेंएकलपीठ के फैसले को चुनौती देते हुए प्रार्थी ने डिवीज़न बेंच में अपील दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 19' के तहत केवल तभी अपील स्वीकार्य होती है, जब अदालत ने प्रतिवादी अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया हो। यदि एकलपीठ ने अधिकारियों को दोषी ही नहीं माना और याचिका खारिज कर दी, तो उसके खिलाफ सीधी अपील पोषणीय नहीं है। इसी तकनीकी कानूनी बिंदु के आधार पर कोर्ट ने अपील खारिज कर IAS टीना डाबी, SDM रूबी अंसार और तहसीलदार मेघना गुप्ता को पूरी तरह राहत दे दी।

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