गाजियाबाद: समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के राम मंदिर और भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर दिए गए बयान पर सियासी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा नेता नाजिया इलाही खान ने एसटी हसन के बयान को लेकर सपा पर निशाना साधा और अखिलेश यादव पर हिंदुओं के खिलाफ बयान देने वालों को खुली छूट देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हिंदुओं को तय करना होगा कि उन्हें किसे चुनना है।
'समाजवादी कम, नमाजवादी ज्यादा लगते हैं'भाजपा नेता नाजिया इलाही खान ने सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी के चरित्र, समाजवादी पार्टी के नेताओं के जो स्टेटमेंट होते हैं, वो समाजवादी से कम नमाजवादी ज्यादा लगते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेताओं को हिंदुओं, सनातन धर्म और हिंदुओं के त्योहारों के खिलाफ बोलने की खुली छूट दे रहे हैं।
नाजिया इलाही खान ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को हिंदुओं के वोट से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के हिंदुओं को यह तय करना पड़ेगा कि उन्हें किसे चुनना है।
'योगी जी को लाना पड़ेगा'नाजिया इलाही खान ने मंदिर, दीपावली, करवा चौथ और नवरात्रि का जिक्र करते हुए कहा कि यदि हिंदुओं को ये सभी उत्सव मनाने हैं, तो योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “मंदिर चाहिए हिंदुओं को, दीपावली मनानी है हिंदुओं को, करवा चौथ मनाना है हिंदुओं को, नवरात्रि मनानी है हिंदुओं को। अगर ये सारे उत्सव मनाने हैं, तो फिर योगी जी को तीसरी बार लेकर आना पड़ेगा।”
एसटी हसन ने भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर क्या कहा था?समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में उन्होंने कहा कि किसी को नहीं पता कि भगवान राम का जन्म कहां हुआ था।
एसटी हसन के मुताबिक, अयोध्या में 12 से अधिक मंदिर ऐसे हैं, जो भगवान राम का जन्मस्थान होने का दावा करते हैं। उन्होंने दक्षिण भारत में भी एक अयोध्या होने और वहां के लोगों द्वारा भी यही दावा किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वास्तविकता में राम का जन्म कहां हुआ, यह कोई नहीं जानता।
राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी की टिप्पणीएसटी हसन ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी अदालत में यह स्वीकार किया था कि अयोध्या में खुदाई वाले स्थल पर किसी मंदिर के अवशेष नहीं मिले।
पूर्व सांसद के मुताबिक, अदालत ने वर्षों से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए जनभावनाओं के आधार पर फैसला दिया था। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।
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