पटना: जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं। वे लगातार बेबाक बयानबाजी करते हैं। इसी क्रम में उन्होंने केंद्र सरकार और पीएम मोदी के सबसे बड़े नारे सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल भावना को डिफाइन करने का काम किया है। केंद्रीय मंत्री के बेटे ने बताया है कि इस नारे की मूल भावना किस परिस्थिति में सही साबित होगी। उन्होंने कहा है कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की मूल भावना तभी पूरी होगी, जब सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित हो।
पीएम मोदी के नारे की मूल भावना पर बहसउन्होंने कहा है कि वर्तमान में केंद्र एवं , अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के पात्र विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क में छूट, नामांकन एवं ट्यूशन फीस में सहायता की विभिन्न योजनाएं संचालित हैं। EWS विद्यार्थियों को भी कुछ योजनाओं तथा IIT और NIT जैसे संस्थानों में पारिवारिक आय के आधार पर ट्यूशन फीस में छूट मिलती है। हालांकि, इन सुविधाओं का दायरा अभी व्यापक और एकसमान नहीं है। उदाहरण के लिए, UPSC की परीक्षाओं में EWS अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट नहीं मिलती।
केंद्रीय मंत्री के बेटे ने की बहसमांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आगे कहा है कि आवश्यकता है कि EWS वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए भी व्यापक वित्तीय सहायता नीति बनाई जाए। इसके तहत UPSC, BPSC, SSC, NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क में रियायत, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में नामांकन शुल्क और ट्यूशन फीस में आय आधारित छूट तथा IIT, मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रवृत्ति की व्यवस्था हो। हॉस्टल, मेस और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्चों के लिए भी सहायता का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक अभाव किसी योग्य विद्यार्थी की उच्च शिक्षा में बाधा न बने।
गठबंधन में शामिल है मांझी की पार्टीउन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसके बारे में अपील की है। उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखआ है कि मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी एवं सभी राज्य सरकारों से आग्रह करता हूं कि EWS के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए ऐसी समग्र सहायता नीति बनाने पर गंभीरता से विचार करें। हमारा उद्देश्य किसी वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करना नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना है।
कमजोर वर्ग के छात्रों को लेकर सवाल?संतोष कुमार सुमन ने आगे कहा है कि और सामाजिक उद्देश्य है, वहीं आर्थिक सहायता का आधार जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति होनी चाहिए। सामाजिक न्याय तभी अधिक व्यापक और प्रभावी होगा, जब उसके साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित हो।