नई दिल्ली: देश में विदेश से आने वाली दवाओं, मेडिकल उपकरणों और कॉस्मेटिक उत्पादों को मंगाना और उनकी सप्लाई करना आसान हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन उत्पादों के आयात के लिए देश में अधिक एंट्री पॉइंट बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक में नए इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) और अन्य केंद्रों को मंजूरी देने की तैयारी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया ड्राफ्टस्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 43A में बदलाव का मसौदा जारी किया है। फिलहाल इसी नियम के तहत तय होता है कि विदेश से आने वाली दवाओं को किन बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य रास्तों से भारत में प्रवेश की अनुमति होगी।
इन जगहों पर बढ़ेंगी सुविधाएंप्रस्ताव के मुताबिक, हरियाणा में सोनीपत, पियाला और हरसारू, उत्तर प्रदेश में दादरी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गुजरात में गांधीनगर/मुंद्रा, तेलंगाना में हैदराबाद के सनतनगर और थिम्मापुर तथा कर्नाटक में बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड और बोम्मासांद्रा को इस सूची में शामिल किया जाएगा। बोम्मासांद्रा में विशेष आर्थिक क्षेत्र को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जरिए हवाई मार्ग से दवाओं के आयात की सुविधा देने का प्रस्ताव है। बाकी प्रस्तावित केंद्रों में कंटेनर डिपो और विशेष आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं।
क्या होगा आम लोगों को फायदा?अभी विदेश से आने वाली दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खेप को सीमित अधिकृत केंद्रों से ही क्लीयरेंस मिल सकता है। नए केंद्र जुड़ने से आयातकों को अपने गोदाम, फैक्ट्री या वितरण केंद्र के नजदीक ही सामान छुड़ाने की सुविधा मिल सकती है।
मामले में क्या है सरकार का माननाइससे सामान को लंबी दूरी तक सड़क या दूसरे माध्यमों से ले जाने की जरूरत कम होगी। परिवहन का खर्च और क्लीयरेंस में लगने वाला समय भी घट सकता है। सरकार का मानना है कि इससे दवाओं, मेडिकल उपकरणों और कॉस्मेटिक उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत होगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विदेश से आने वाली दवाएं सीधे बाजार में बिकने लगेंगी। आयात के लिए जरूरी लाइसेंस, गुणवत्ता जांच और अन्य नियामकीय शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी।
अभी सुझाव मांगे गएयह फिलहाल सरकार का प्रस्ताव है, अंतिम फैसला नहीं। मंत्रालय ने मसौदे पर लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसके बाद नियमों में बदलाव को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैच रिलीज के लिए देना होगा विवरणनए प्रस्ताव के तहत दवा कंपनियों को हर बैच को बाजार में भेजने से पहले एक योग्य और अनुभवी व्यक्ति से मंजूरी लेनी होगी। इस काम के लिए कंपनी को संबंधित व्यक्ति को औपचारिक रूप से अधिकृत करना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक, दवा निर्माण का लाइसेंस लेने वाली कंपनियों को बैच रिलीज के लिए जिम्मेदार अधिकारी का विवरण देना होगा। साथ ही, हर बैच की रिलीज से जुड़े रिकॉर्ड और तय प्रारूप में बैच रिलीज सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य होगा।
अधिकृत व्यक्ति का स्पष्ट प्रावधान नहींदरअसल, दवा बाजार में भेजने से पहले उसके गुणवत्ता मानकों और परीक्षण रिपोर्ट समेत जरूरी दस्तावेजों की समीक्षा की जाती है। इसे बैच रिलीज कहते हैं। फिलहाल नियमों में निर्माण और परीक्षण के लिए जिम्मेदार तकनीकी कर्मचारियों का विवरण देना जरूरी है, लेकिन बैच रिलीज करने वाले अधिकृत व्यक्ति का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। नए प्रस्ताव से यह पता चल सकेगा कि किसी दवा के बैच को बाजार में भेजने की मंजूरी किसने दी। इससे गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जांच और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव भी मांगे हैं।
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