नई दिल्ली: केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलटीसीजी टैक्स रिलीफ पर बड़ा हिंट दे दिया। उन्होंने माना कि एफआईआई की बिकवाली और बदलती ग्लोबल स्थितियों के बीच रिटेल और संस्थागत निवेशकों में चिंता लाजिमी है। उन्होंने साफ किया कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत की मांगों पर विचार करेगी। वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद पर भरोसा जताया। उनके मुताबिक, 7 फीसदी से ज्यादा की विकास दर बनाए रखने के लिए पूंजी की जरूरत है। सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास को रफ्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 में पहुंची हुई थीं। उन्होंने इस दौरान स्वीकार किया कि शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और टैक्सेशन स्ट्रक्चर को लेकर चिंता का माहौल है।
बजट से पहले किया जाएगा विचारसीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में जब रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया था तब भी टैक्स ढांचा यही था। लेकिन, अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। चुनौतियां बढ़ी हैं। निवेशकों की चिंता की आवाजें तेज हुई हैं।
मार्केट रेगुलेटर सेबी के विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स हटाने की सिफारिशों के बीच वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार बजट से पहले इन सभी सुझावों और मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।
अर्थव्यवस्था में कमजोरी के कोई संकेत नहींएचएसबीसी इंडिया के कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने साफ किया कि भारत के प्रमुख इकोनॉमिक इंडिकेटर्स में कमजोरी का कोई संकेत नहीं है। उन्होंने रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन, मजबूत बैंकिंग सेक्टर और घटती गरीबी दर का हवाला दिया। इसके जरिये देश की आर्थिक मजबूती पर रोशनी डाली।
सीतारमण ने कहा कि कुछ जानकार लोग भी भारत के इकोनॉमिक आउटलुक पर संदेह जताते हैं। लिहाजा, उन्होंने नागरिकों और उद्योग जगत से भारत के विकास के बारे में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बात करने की अपील की। वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की स्थिरता और नीतिगत निरंतरता की तारीफ भी की।
सरकार की प्राथमिकताओं से कराया रूबरूनिर्मला सीतारमण ने आगामी बजट और सरकारी प्राथमिकताओं का रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे और कैपेक्स पर खर्च जारी रखेगी। मकसद यह है कि निजी निवेश को रफ्तार मिल सके। इसके साथ ही वित्तीय अनुशासन यानी फिस्कल प्रूडेंस सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता रहेगी।
वित्त मंत्री ने जन कल्याणकारी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन का जिक्र किया। 2047 तक सभी के लिए बीमा कवरेज और आसान कर्ज पहुंच का टारगेट रखा। रोजगार के मोर्चे पर सरकार की योजना हर जिले में एआई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की है। मकसद यह है कि युवाओं को भविष्य की तकनीक आधारित नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके। साथ ही बैंकिंग प्रणाली में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।
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