नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान मुरासु 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह तूफान सोमवार देर रात करीब 11 बजकर 30 मिनट पर दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा, इस दौरान इसकी स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तूफान के असर से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस आपदा से निपटने के लिए 5 राज्यों में 37 NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। वहीं ओडिशा के कई जिलों के करीब डेढ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मुरासु का लैडफॉल ऐसे समय में हो रहा है, जब कुछ दिन पहले ही तूफान अर्नब ने तबाही मचाई थी।




नेल्लोर और नरसापुर के बीच करेगा लैंडफॉलIMD के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, यह तूफान आज रात करीब 11.30 बजे नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा, इसका लैंडफॉल करीब मंगलवार सुबह 3 बजे तक चलेगा। इस दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। चेन्नई, मछलीपट्टनम और विशाखापत्तनम में लगे डॉप्लर वेदर रडार के जरिए मुरासु चक्रवात पर लगातार नजर रखी जा रही है।




आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ में NDRF की 37 टीमें तैनात की गई हैं। यह टीमें चक्रवात से प्रभावित होने वाले इलाकों में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करेंगी। चक्रवात की मुख्य केंद्र आंध्र प्रदेश है, इसलिए NDRF की 13 टीमें आंध्र प्रदेश में तैनात की गई हैं।




1.6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गयाचक्रवाती तूफान के संभावित असर को देखते हुए ओडिशा के पांच संवेदनशील जिलों से 1.6 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोग अकेले गंजाम जिले से हैं। वहीं कई हजार और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।






आंध्र प्रदेश में 19 घरेलू उड़ानें रद्दवहीं इस चक्रवाती तूफान के कारण सोमवार को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों से संचालित होने वाली कम से कम 19 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। विजयवाड़ा हवाई अड्डे के निदेशक एम. लक्ष्मी कांथा रेड्डी ने बताया कि इंडिगो ने 10 और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने दो उड़ानें रद्द की हैं




चंद्रबाबू नायडू ने जारी किए निर्देशआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात मुरासु के मद्देनजर सोमवार को अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया। है। साथ ही कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सूचित किया कि श्रीकाकुलम से कृष्णा जिले तक बिजली के 31,000 खंभे भेजे जा चुके हैं। बिजली बहाली के काम में सहायता के लिए चेन्नई से 1,000 अन्य कर्मचारी आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें नेल्लोर और प्रकाशम सहित विभिन्न जिलों में तैनात किया जाए।




आंध्र प्रदेश में भारी से बेहद भारी बारिश का अलर्टतूफान के प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश में 2 और 3 नवंबर को कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की भी आशंका है। 4 नवंबर को भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। रायलसीमा में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है।






उत्तर तमिलनाडु में 2 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और 3 नवंबर को भारी बारिश की संभावना है। तेलंगाना में 2 नवंबर से बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। 3 नवंबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण ओडिशा और दक्षिण छत्तीसगढ़ में 2 से 4 नवंबर के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट है।




समुद्र में उठ सकती हैं 2 मीटर तक ऊंची लहरेंIMD ने तूफान के दौरान समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी है। दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में लैंडफॉल के दौरान करीब 1.5 से 2 मीटर ऊंची तूफानी लहरों के कारण जलभराव हो सकता है। बापटला के अलावा कृष्णा और प्रकाशम जिलों में इसका सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।




मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाहमौसम विभाग ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। आंध्र प्रदेश के तट पर 2 से 4 नवंबर की दोपहर तक मछली पकड़ने की गतिविधियां पूरी तरह बंद रखने की चेतावनी दी गई है। उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटों पर भी 4 नवंबर की सुबह तक समुद्र में जाने से बचने को कहा गया है।




क्या होते हैं चक्रवाती तूफानचक्रवात समुद्र के उथले पानी में बनने वाली बवंडर होते हैं। ये बंगाल की खाड़ी और उत्तर भारतीय महासागर में सामान्य होते हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज हवाएं झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, छतों को उड़ाकर ले जा सकती हैं और पेड़ उखाड़ सकती हैं। फसलें, बागवानी और बाग भी प्रभावित हो सकते हैं।

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