हजारीबागः झारखंड के हजारीबाग में एनटीपीसी की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा गया है। बताया गया है कि ग्रामीण पेयजल योजना के लिए करीब 12.78 करोड़ की लागत से पानी टंकी का निर्माण कराया जा रहा था। इसके लिए ठेकेदार को लगभग 10.70 करोड़ का भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन एनटीपीसी ने इसे डायनामाइट लगवाकर उड़ा दिया।
मंत्री योगेंद्र ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि बड़कागांव और प्रखंड के कई गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए वाटर टावन बनाने का काम लगभग 95 प्रतिशत पूरा भी हो चुका था, लेकिन एनटीपीसी की ओर से इस वाटर टावर को ध्वस्त कर दिया गया। एनटीपीसी की इस कार्रवाई से पेयजल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
एफआईआर दर्ज करने का निर्देशमामले को गंभीरता से लेते हुए ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि समीक्षा बैठक के दौरान उन्हें इस बात की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि बड़कागांव और प्रखंड के कई गांवों में जलापूर्ति को लिए तैयार एनटीपीसी की ओर से बिना कोई सूचना दिए या शिफ्टिंग का आग्रह किए बगैर डायनामाइट लगाकर वाटर टावर को ध्वस्त कर दिया गया। इसे लेकर जिला प्रशासन को भी कोई सूचना नहीं दी गई, न ही विभाग को जानकारी दी गई। अपने बल पर टावर को ध्वस्त कर दिया गया। इसे लेकर विभाग की ओर से 31 अक्तूबर को स्थानीय थाना प्रभारी को पत्र लिखकर मामले की पूरी जानकारी दी गई है।
एनटीपीसी प्रबंधन का गुंडागर्दी पहले भी सामने आयामंत्री ने बताया कि का गुंडागर्दी पहले भी सामने आया। इस साल 8 जनवरी को इसी योजना के सर्विस पाइप को क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना विभागीय अभियंताओं की ओर से स्थानीय थाने को दी गई थी। इसके अलावा भी क्षेत्र में चल रही सात छोटी योजनाओं को भी क्षति पहुंचाई गई। 10 करोड़ की लागत से पूरी होने वाली इन पेयजल आपूर्ति योजनाओं के अलावा कई अन्य योजनाओं को भी नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है। इसे लेकर विभाग को जांच कराने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कार्यपालक अभियंता को पूरे मामले में छानबीन कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
स्वच्छ पेयजल आपूर्ति कराने का सपना अब पूरा नहीं होगा मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि एनटीपीसी की ओर से इस तरह की कार्रवाई से बड़कागांव की बड़ी आबादी को फिलहाल स्वच्छ उपलब्ध कराने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा, लेकिन सरकार लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
योजना हर हाल में पूरी होगी, एनटीपीसी को क्षतिपूर्ति भी देना होगाउन्होंने बताया कि खनन क्षेत्र में राज्य सरकार की किसी योजना से बाधा उत्पन्न होती है, तो कंपनी की ओर से विभाग के अनुरोध किया जाता है। योजना को शिफ्ट करने के लिए संबंधित कंपनी को विभाग में पैसा भी जमा कराना होता है, लेकिन एनटीपीसी ने ऐसा न कर अपने संसाधनों से वाटर टावर को ही ध्वस्त कर दिया। इसे लेकर पिछले दिनों हजारीबाग की बैठक में एनटीपीसी के जीएम से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने वरीय अधिकारियों से जानकारी लेकर विभाग को स्थिति से अवगत कराने का भरोसा दिलाया था। लेकिर योजना हर हाल में पूरी होगी और एनटीपीसी को क्षतिपूर्ति भी देना होगा।
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