बॉलीवुड एक्‍टर गोविंदा 'जेन-जी' शब्‍द सुनकर नाराज हो गए! जी हां, वह हाल ही भोपाल में एक स्कूल के एनुअल डे सेलिब्रेशन में पहुंचे थे। वहां वह मौजूद छात्रों और मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान उनसे देश में चल रहे जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सवाल किया गया। पहले तो वह इस सवाल से बचते दिखे, कई बार इसका जिक्र सुन वह परेशान भी हुए। लेकिन फिर कहा कि देश के युवाओं को यह समझना जरूरी है कि वह जो कर रहे हैं, उसके पीछे किसकी सोच और प्रेरणा है। कहीं इसके पीछे कोई राजनीति तो नहीं है। लगे हाथ गोविंदा ने अपनी राजनीतिक पारी का भी जिक्र किया। कहा कि उन्‍हें राजनीति रास नहीं आई।




'दैनिक भास्‍कर' की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को गोविंदा भोपाल में थे। स्‍कूल इवेंट के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्‍या वह वह जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं? तो पहले तो उन्होंने जवाब देने से परहेज किया। फिर कहा, 'मुझे सवाल में मत अटकाइए। मैं यह कह रहा हूं कि ये बच्चे जहां भी, जो भी कर रहे हैं, उन्हें उसके पीछे के हालात को समझना चाहिए।'




गोविंदा ने पूछा- ये Gen-Z शब्‍द कहां से प्रकट हुआ?'हीरो नंबर 1' ने आगे कहा, 'जिस उम्र में आप हैं, वहां अपनी मां से पूछिए कि क्‍या मैं जो कर रहा हूं, वह सही है? जिन बच्‍चों में पढ़ने-लिखने के बावजूद यह समझने की क्षमता है कि वह जो कर रहे हैं, वह सही है या नहीं, उन्‍हें यह भी समझना जरूरी है कि यह राजनीति है।' गोविंदा ने इस दौरान Gen-Z शब्‍द पर भी आपत्त‍ि जताई। पूछा कि ये कहां से प्रकट हुआ है?




गोविंदा बोले- मुझे राजनीति शब्‍द ही अच्‍छा नहीं लगता, यह मुझे रास नहीं आईगोविंदा ने एक ओर जहां 160 से ज्यादा फिल्‍में की की हैं, वहीं साल 2004 में उन्‍होंने भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी भी शुरू की थी। उन्‍होंने मुंबई से लोकसभा चुनाव जीता और संसद पहुंचे। हालांकि, सदन से अक्‍सर गायब ही रहे। आख‍िरकार 2008 में उन्‍होंने राजनीति से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। स्‍कूल इवेंट में अपनी राजनीतिक पारी की बात करते हुए एक्‍टर ने कहा, 'राजनीति मुझे रास नहीं आई। मैं राजनीति से बियॉन्ड रहा हूं और मुझे राजनीति शब्द ही अच्छा नहीं लगता।' जब गोविंदा से पूछा गया कि क्या राजनीति अच्छा शब्द नहीं है? तो उन्होंने कहा, 'संविधान भी इसी व्यवस्था से चलता है। किसी विषय में अपनी भूमिका और दखल की भी एक सीमा होती है।






गोविंदा का राजनीतिक करियरसाल 2004 में गोविंदा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और मुंबई से लोकसभा के लिए चुने गए। उन्होंने लगातार 5 बार से सांसद रहे उम्मीदवार को 50,000 वोटों से हराया। चुनाव के दौरान उन्होंने कहा कि उनका एजेंडा 'प्रवास' (परिवहन), 'स्वास्थ्य' और 'ज्ञान' (शिक्षा) होगा। परिवहन के क्षेत्र में उन्होंने पश्चिमी रेलवे ज़ोन के बोरीवली-विरार सेक्शन को चार गुना करने का श्रेय खुद को दिया। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में भी कुछ प्रयास किए थे। गोविंदा ने वसई और विरार में आंगनबाड़ियां बनाने और पीने के पानी की समस्या को हल करने के लिए अपने सांसद कोटे से पैसे आवंटित किए, लेकिन प्रशासनिक मंजूरी मिलने में देरी हो गई।






बतौर सांसद गोविंदा की किरकिरी, इस्तीफा और फिर श‍िवसेना में एंट्रीसांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गोविंदा लोकसभा सत्र से अक्सर गायब रहे। इस कारण उनकी खूब आलोचना हुई। सांसद रहते हुए भी उन्होंने अपना फ‍िल्मी करियर जारी रखा। साल 2007 में 'पार्टनर' फ‍िल्म से कमबैक के बाद 20 जनवरी 2008 को गोविंदा ने राजनीति छोड़ने और अपने एक्‍ट‍िंग करियर पर फोकस करने का फैसला किया। बाद में एक इंटरव्‍यू में गोविंदा ने कहा कि राजनीति में शामिल होकर उन्होंने अपना समय बर्बाद किया और इसका उनकी फ‍िल्मों पर बुरा असर पड़ा। हालांकि, साल 2024 के भारतीय आम चुनाव से पहले गोविंदा ने शिव सेना में शामिल होने का फैसला किया।






गोविंदा को मां की सलाह और 7 साल तक 24 लाख गायत्री मंत्रों की साधनास्‍कूल इवेंट में छात्रों से बातचीत के दौरान गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी को भी किया। 62 साल के एक्‍टर ने बताया कि 14 साल की उम्र से ही वह फिल्मों में काम पाने के लिए प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगाया करते थे। इसी चक्‍कर में एक बार वह पुलिस चौकी भी पहुंच गए थे। गोविंदा ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें 14 से 21 साल की उम्र तक 24 लाख गायत्री मंत्रों का जाप करने की सलाह दी थी। उन्होंने नियमित रूप से गायत्री साधना की। इससे उनकी तबीयत में सुधार हुआ। पूजा-पाठ और आध्यात्मिकता की ओर उनका झुकाव बढ़ा। उनके घर अलग-अलग धर्मों के साधु-संत, पीर-फकीर आते थे, जिनसे उन्हें जिंदगी को समझने का मौका मिला।




बॉलीवुड शब्द ही पसंद नहीं, देश से वर्ल्ड लेवल का सिनेमा बनना चाहिएसाल 1986 में 'लव 86' से डेब्‍यू करने वाले गोविंदा ने कहा कि उन्‍हें 'बॉलीवुड' शब्द भी पसंद नहीं है। एक्‍टर के मुताबिक, भारतीय सिनेमा को सिर्फ बॉलीवुड शब्द तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। देश से विश्वस्तरीय सिनेमा बनना चाहिए। वेब सीरीज में बढ़ते बोल्ड और अश्‍लील कंटेंट को पर भी उन्‍होंने बात की। कहा कि हर तरह के दर्शक हैं और इसलिए अलग-अलग तरह का कंटेंट बनता है। यदि किसी को कोई कंटेंट पसंद नहीं है या वह परिवार के साथ बैठकर नहीं देख सकता, तो उसे नहीं देखना चाहिए।

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