पटना: बिहार में आठ सीटों पर एमएलसी चुनाव संपन्न हो चुका है। इन आठ सीटों में से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव से पहले इन आठ सीटों में राजद के पास कोई सीट नहीं थी। अब पार्टी का दरभंगा स्नातक और पटना शिक्षक सीट पर कब्जा है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद के डॉ. संजीव कुमार ने जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव को शिकस्त दी। नवल किशोर यादव पिछले करीब 30 वर्षों से इस सीट पर लगातार जीतते आ रहे थे। वहीं, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भी राजद के अनिल झा ने जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के सर्वेश कुमार को हराया। चुनाव नतीजों के बाद राजद ने अपने विरोधियों को जवाब दिया, जो उस पर MY की पार्टी होने का आरोप लगाते हैं।
राजद ने बताया - उनके किस जाति से कितने MLCएमएलसी चुनाव में जीत के बाद राजद ने ट्विटर पर पोस्ट कर अपने एमएलसी सदस्यों का जातिवार आंकड़ा जारी किया है। राजद ने लिखा कि कुल विधान पार्षद में राजद ने सभी जातियों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव लगातार A टू Z की बात कर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश में लगे हुए हैं। विधानसभा चुनाव में बेईमानी नहीं होती और अगर हमारी सरकार होती तो सबकी और अधिक हिस्सेदारी होती।
राजद में यादव-मुस्लिम समाज से ज्यादा भूमिहार MLCराजद की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार विधान परिषद में राजद के सबसे ज्यादा एमएलसी भूमिहार समाज से हैं। राजद में भूमिहार समाज से 4 एमएलसी हैं। वहीं मुस्लिम समाज से 3, यादव समाज से 3, ब्राह्मण और राजपूत समाज से 2-2 एमएलसी हैं। वहीं अनुसूचित जाति, अति पिछड़ा वर्ग और वैश्य समाज से एक-एक एमएलसी है।
राजद ए टू जेड की राजनीति का संदेश देने की कोशिश मेंराजद के इस ट्वीट पर राजनीति के जानकारों का मानना है कि विधान परिषद में जातिवार एमएलसी के इन आंकड़ों के जरिए राजद अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण से आगे बढ़कर ए टू जेड की राजनीति का संदेश देने की कोशिश कर रही है। कई बार कह चुके हैं कि जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।
राजद ने लालू राज की भी दिलाई यादइस दौरान राजद ने के शासन काल का जिक्र किया है। राजद ने कहा कि लालू यादव की सरकार में सबसे अधिक मंत्री सवर्ण, मुस्लिम, अतिपिछड़ा और अनुसूचित जाति से होते थे। पिछड़ा में सबसे अधिक कुशवाहा जाति से मंत्री थे। उनके बाद कभी भी मंत्रियों की वह संख्या नहीं रही।