ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 1 नवंबर 2026 को दोपहर 02:51 बजे से होगी और इसका समापन 2 नवंबर 2026 को दोपहर 01:10 बजे होगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत प्रदोष काल और रात्रि में तारों अथवा चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोला जाता है. क्योंकि अष्टमी तिथि के दौरान सांझ के समय तारों और रात में चंद्रमा के दर्शन 1 नवंबर को ही होंगे, इसलिए यह व्रत 1 नवंबर को ही रखा जाएगा.
ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और संकल्प के लिए सर्वोत्तम माना गया है. रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र का पड़ना रवि पुष्य योग का निर्माण करता है, जिसे स्वयं-सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग सभी मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला है.
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा बताती हैं कि इस दुर्लभ योग में माताओं द्वारा किए गए व्रत और पूजन से संतान के जीवन में आने वाली बाधाएं, कुंडली के ग्रह-दोष, नजर-दोष और बीमारियां पूरी तरह दूर होती हैं तथा बच्चों को करियर में अपार तरक्की मिलती है.
अहोई माता को वास्तव में माता पार्वती का ही ममतामयी स्वरूप माना जाता है. शास्त्रों में इन्हें संतानों की जीवनदायिनी, संरक्षिका और मातृत्व का वरदान देने वाली देवी कहा गया है.
पौराणिक परंपरा के अनुसार, अहोई माता के साथ साही (स्याऊ माता) और उनके बच्चों का पूजन किया जाता है. प्रचलित लोककथा के अनुसार, एक साहूकार की बहू से घर की लीपापोती के लिए मिट्टी खोदते समय अनजाने में साही के बच्चे मर गए थे. इस अनजाने पाप के कारण उसकी अपनी संतानों पर संकट आ गया.
अपनी भूल का गहरा पश्चाताप करते हुए उसने साही माता और भगवती पार्वती की कठोर तपस्या की और क्षमा याचना की. माता ने उसकी सच्ची निष्ठा और पश्चाताप से प्रसन्न होकर उसकी संतानों को दीर्घायु और सुरक्षा का आशीर्वाद दिया. तभी से दीवारों पर गेरू से अहोई माता और स्याऊ के आठ कोष्ठक बनाकर उनकी पूजा करने की परंपरा चली आ रही है.
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