Diwali Shopping Special: दीपावली के महापर्व से ठीक पहले घर-परिवार में सुख, समृद्धि और स्थायित्व लाने के लिए खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि एक स्वर्णिम अवसर लेकर आ रही है. रविवार के दिन 27 नक्षत्रों के राजा 'पुष्य' का संचरण होने से इस पावन दिन पर 'रवि पुष्य नक्षत्र' का महासंयोग बन रहा है.
इसके साथ ही इस पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ प्रभाव भी बना रहेगा, जो किसी भी नए कार्य, व्यापार और स्थायी निवेश के लिए शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर-जोधपुर) के निदेशक, विख्यात भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, रविवार, सप्तमी तिथि और पुष्य नक्षत्र का यह त्रिवेणी संगम किसी भी शुभ कार्य को चिर-स्थायी और अक्षय फल प्रदान करने वाला है.
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से रविवार और सप्तमी तिथि, दोनों के अधिपति प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य हैं. वहीं पुष्य नक्षत्र के स्वामी कर्मफलदाता शनि देव हैं और इसके अधिष्ठाता देव देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं. वर्तमान समय में शनि का मीन राशि में गोचर इस योग की शुभता को और अधिक बल दे रहा है.
रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रमुख शुभ मुहूर्त:
भूमि, भवन और मकान की रजिस्ट्री के लिए श्रेष्ठ समय:
डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि पुष्य नक्षत्र का सीधा संबंध शनि देव से है, जिन्हें स्थायित्व और अचल संपत्ति का कारक माना गया है. इसलिए इस दिन जमीन, मकान या फ्लैट में निवेश करना सबसे सुरक्षित और शुभ माना जाता है.
इस दिन नए मकान या फ्लैट की रजिस्ट्री कराना, एग्रीमेंट साइन करना अथवा नए प्लॉट के लिए टोकन मनी देना अत्यंत फलदायी रहता है.
शनि के शुभ प्रभाव के चलते संपत्ति से जुड़े विवादों की संभावना कम होती है और निवेश में निरंतर वृद्धि होती है.
इसके अलावा लंबी अवधि की वित्तीय योजनाएं, फिक्स्ड डिपॉजिट और जीवन बीमा पॉलिसी शुरू करने के लिए भी यह समय सर्वोत्तम है.
सोना-चांदी, वाहन और घरेलू वस्तुओं की खरीदारी:
रवि पुष्य नक्षत्र के दिन धातु और नए उपकरणों की खरीदारी करना घर में मां लक्ष्मी के स्थायी वास का प्रतीक माना जाता है.
नए व्यापार, स्टार्टअप और बही-खातों की शुरुआत:
व्यापारियों और नए उद्यमियों के लिए रवि पुष्य का दिन किसी वरदान से कम नहीं है. पुष्य नक्षत्र में शुरू किया गया उद्यम लंबे समय तक लाभ और प्रतिष्ठा देता है.
कारोबारी इस दिन नए वित्तीय सत्र और दीपावली पूजन के निमित्त नए बही-खाते (चोपड़ा) और कलम खरीदते हैं. अगर आप कोई नया स्टार्टअप, नई दुकान, फर्म या साझेदारी की शुरुआत करना चाहते हैं, तो इस दिन गणेश पूजन के साथ कार्य आरंभ करना सफलता की राह आसान करता है.
नए व्यावसायिक समझौतों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर के लिए अभिजीत मुहूर्त का समय विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होगा.
आध्यात्मिक अनुष्ठान और दान का विशेष महत्व:
पुष्य नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति होने के कारण इस दिन पूजा-पाठ और गुरु कृपा प्राप्ति के उपाय विशेष फल देते हैं. रविवार और सप्तमी का योग होने के कारण सुबह स्नान के उपरांत तांबे के लोटे में जल, रोली और अक्षत डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें.
देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, बेसन की मिठाई या धार्मिक पुस्तकों का दान करें. इस दिन मन में मंगल भावना रखकर किए गए कार्य घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करते हैं.
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