लखनऊ: यूपी के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात थी। इसके बाद उन्होंने 'अपनी जनता पार्टी' के इंडिया गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से जब इसको लेकर सवाल पूछा गया तो उनका लहजा सख्त हो गया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे गठबंधन में नहीं हैं। वे सपा की सीटों की गिनती में नहीं शामिल हैं। उन्होंने मीडिया से उनको इग्नोर करने की बात भी बोल दी।
दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच ये तल्खी पुरानी है। 2022 यूपी चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी छोड़कर सपा में आ गए थे। सपा ने उनको पार्टी का महासचिव और एमएलसी भी बनाया। वैचारिक मतभेदों के चलते स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2024 की शुरुआत में सपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। साथ ही एमएलसी पद भी छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने खुद की पार्टी बना ली।
पीडीए पॉलिटिक्स पर उठाए थे सवाल
सपा छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार अपनी सभाओं और प्रेस वार्ताओं में सपा और अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं। एक बार उन्होंने सपा की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाया। मौर्य ने कहा था- अखिलेश यादव पीडीए में डी का मतलब कभी दलित बताते हैं तो कभी डिंपल यादव। जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं कंफ्यूज हो, वह अपनी पार्टी और प्रदेश को क्या दिशा दे सकता है?
मौर्य बोले थे- अखिलेश से वैचारिक मतभेद हैं, मनभेद नहीं
आपको बता दें कि सपा छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि अखिलेश यादव से उनका वैचारिक मतभेद है मनभेद नहीं है। अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा से विपरीत जा रहे हैं। मौर्य के मुताबिक, उन्होंने अखिलेश यादव के नाम अपने इस्तीफे का पत्र भेजा था, लेकिन अखिलेश ने उनसे बात करना मुनासिब नहीं समझा।
अखिलेश बोले थे- किसी के मन में क्या, कोई नहीं जानता
स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा छोड़ने के बाद अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने कहा था कि किसी के मन में क्या चल रहा है यह कोई नहीं जानता है। यहां हर कोई अपने फायदे के लिए भाग रहा है।
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