जयपुर: राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद विवाद का मामला लगातार सुर्खियों में है। इस बीच सवालों के घेरे में आए 'गोयल फैशंस' के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय गोयल का बड़ा बयान सामने आया है। संजय गोयल पर भी अधिकारी से सांठगांठ करने के आरोप लगे हैं। उनके बयान के बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है। संजय गोयल ने न केवल खुद को बेकसूर बताया, बल्कि शिखर अग्रवाल को भी क्लीन चिट देते हुए कहा कि इस सौदे में उनका कोई संदिग्ध रोल नहीं है।




उन्होंने दावा किया कि राजस्थान सरकार ने उनकी कंपनी को कोई अनुचित लाभ नहीं पहुंचाया है। संजय गोयल के सामने आने के बाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।






संजय गोयल ने खुद पर लगे आरोपों को किया खारिजआईएएस शिखर अग्रवाल मामले में 'गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड' पर अनुचित लाभ लेने के आरोप लगे हैं। एक समाचार चैनल से बातचीत में संजय गोयल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शिखर अग्रवाल या राज्य सरकार की ओर से उन्हें कोई अनुचित लाभ नहीं दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिखर अग्रवाल के परिवार को कम कीमत पर विला-कॉटेज नहीं दिए गए हैं। पूरी डील पारदर्शिता से हुई है और उन्हें बाजार दर पर ही कॉटेज बेचे गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि शिखर अग्रवाल से उनके अच्छे व्यावसायिक संबंध रहे हैं।






सरकारी नीति का दिया हवालाइंटरव्यू के दौरान संजय गोयल ने कहा कि उन्हें सरकार से कोई विशेष राहत नहीं मिली है। उन्होंने राज्य सरकार की निवेश नीति का हवाला देते हुए बताया कि 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर एक मानक प्रोत्साहन पैकेज दिया जाता है। इसका निर्णय एक उच्चस्तरीय कमेटी करती है, जिसमें मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल होते हैं। उन्होंने दोहराया कि इस नीतिगत प्रक्रिया में थी।






'बाजार दर पर ही बेचे गए विला'एक सवाल के जवाब में संजय गोयल ने दावा किया कि उन्होंने । जिस रेट पर बाजार में विला-कॉटेज उपलब्ध थे, उसी दर पर उन्हें बेचा गया है। कंपनी ने अन्य ग्राहकों और मित्रों को भी इसी दर पर संपत्ति बेची है। उन्होंने बताया कि एक विला-कॉटेज की बाजार दर 17-18 लाख रुपये के आसपास है और इसी कीमत पर करीब 100 से 150 अन्य लोगों को भी कॉटेज दिए गए हैं।






कंपनी की बिजनेस पॉलिसी का किया खुलासासंजय गोयल ने अपनी कंपनी की नीति समझाते हुए बताया कि इसमें अन्य निवेशकों को भी जोड़ा जाता है। इसके तहत 50 प्रतिशत राशि निवेशक से ली जाती है और 50 प्रतिशत राशि कंपनी लगाकर विला तैयार करती है। इसकी बाजार कीमत 17 से 18 लाख के आसपास ही रहती है। विला बिकने के बाद होने वाला लाभ या हानि निवेशकों के बीच उनके निवेश के अनुपात में बांटा जाता है। उन्होंने अपनी अन्य परियोजनाओं में भी इसी मॉडल के लागू होने की बात कही।






क्या है शिखर अग्रवाल से जुड़ा 40 विला कॉटेज विवाद?उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार में उद्योग एवं एमएसएमई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खरीदारी अवैध तरीके से की गई और इसका अचल संपत्ति रिटर्न में सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।




रिपोर्ट्स के अनुसार, ये संपत्तियां शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर खरीदी गईं। उन्होंने ढाई साल में 'गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड' से कुल 40 विला-कॉटेज खरीदे, जिनमें उदयपुर में वर्ष 2023 में 20 और अलवर में वर्ष 2026 में 20 विला-कॉटेज शामिल हैं। इस खरीद की कुल कीमत 6.16 करोड़ बताई गई है। उन पर बाजार से कम दाम में संपत्ति खरीदने और बदले में कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ APO (पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में) कर दिया है।

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