इंदौर: अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ACS संजय दुबे के भाषण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद संजय दुबे बहुत अच्छे नेता बन सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने कही गई इस बात पर मंच पर मौजूद नेता भी हंसने लगे। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि संजय दुबे ने अपने भाषण में सरकार की योजनाओं को इतनी अच्छी तरह समझाया कि अब उनके लिए ज्यादा कुछ बोलने को नहीं बचा।
संजय दुबे के भाषण ने जीत लिया कैलाश विजयवर्गीय का दिलकार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन के दौरान अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की तारीफ की। उन्होंने कहा कि संजय दुबे ने इतना अच्छा भाषण दिया कि उनका काम आसान हो गया और उन्हें लगा कि अब कहने के लिए ज्यादा कुछ बचा ही नहीं है।
विजयवर्गीय ने अंग्रेजी में कहा कि संजय दुबे का भाषण शानदार था और उसमें पूरा आत्मविश्वास नजर आया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि रिटायरमेंट के बाद संजय दुबे एक बहुत अच्छे नेता बन सकते हैं। उनकी इस बात पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत मंच पर मौजूद लोग मुस्कुराने लगे।
2047 तक शहरों में रहेगी आधी से ज्यादा आबादीकैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक देश की शहरी आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा होने की संभावना को ध्यान में रखकर भविष्य की योजनाएं बनाने पर जोर दिया है। ऐसे में शहरों का विकास केवल सड़क, मकान और ड्रेनेज बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शहर ऐसे होने चाहिए जहां लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें और आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ें।
शहर आर्थिक विकास के इंजन होने चाहिए। एक अच्छे शहर की पहचान यह है कि वहां दिन-रात गतिविधियां चलती रहें और लोगों को काम करने के साथ रहने के लिए भी अच्छा माहौल मिले। विजयवर्गीय ने कहा कि मध्य प्रदेश के शहरों में इस दिशा में काम करने की काफी संभावनाएं हैं।
2000 में आईटी कंपनियों ने इंदौर आने से कर दिया था इनकारविजयवर्गीय ने इंदौर के विकास से जुड़ा अपना पुराना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में जब वे इंदौर के महापौर थे तब देश में आईटी कंपनियों का विस्तार हो रहा था। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय आईटी मंत्री प्रमोद महाजन से इंदौर में आईटी कंपनियां लाने का अनुरोध किया था। इसके बाद टीसीएस, विप्रो और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने इंदौर की संभावनाओं का आकलन किया। करीब 15 दिन बाद कंपनियों की ओर से मिले जवाब में उस समय शहर में आईटी कारोबार के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी बताई गई थी। बिजली की समस्या, खराब सड़कें, नाइट लाइफ की कमी और मॉल जैसी सुविधाओं का नहीं होना इसकी प्रमुख वजहें थीं।
उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन शहर को आगे बढ़ाने के लिए लोगों को साथ लेकर काम करने की जरूरत थी। इसके बाद जनभागीदारी से सड़क निर्माण और पौधारोपण जैसे कामों पर जोर दिया गया।
इंदौर-भोपाल के बाद जबलपुर और ग्वालियर की बारीमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कॉन्क्लेव में शहरी विकास को लेकर सरकार की योजनाएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल को छह-छह जिलों को जोड़कर मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर को भी इसी तरह विकसित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने इंटीग्रेटेड पॉलिसी के तहत इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने और 100 मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति जैसे विषयों पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में शहरी विकास को निवेश, रोजगार और बेहतर सुविधाओं से जोड़ने पर चर्चा हुई।
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