भारत में दीपावली सिर्फ दीयों और मिठाइयों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह देश के ऑटोमोबाइल बाजार के लिए भी सबसे बड़ा उत्सव होता है. धनतेरस और दीपावली के शुभ अवसर पर नया वाहन घर लाना भारतीय परिवारों की एक बड़ी परंपरा बन चुकी है. यही वजह है कि कार और टू-व्हीलर कंपनियां साल भर इस त्योहारी सीजन का इंतजार करती हैं. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन FADA के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हर साल दीपावली के आसपास के 30 से 42 दिनों के त्योहारी सीजन में भारत में गाड़ियों की भारी बिक्री होती है. ऑटोमोबाइल सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा इसी अवधि में सिमटा होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल त्योहारों पर कितनी गाड़ियां बिकती हैं और किस सेगमेंट का दबदबा सबसे ज्यादा रहता है.


त्योहारी सीजन में कितनी होती है गाड़ियों की कुल बिक्री?


भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में दीपावली के दौरान बिक्री का ग्राफ हर साल नए रिकॉर्ड बनाता है. अगर पिछले कुछ सालों के ट्रेंड और FADA के आंकड़ों पर नजर डालें, तो करीब 40 से 42 दिनों के इस पूरे फेस्टिव विंडो में देश में औसतन 40 लाख से 52 लाख से अधिक वाहनों की खुदरा बिक्री होती है.


उदाहरण के लिए, साल 2025 के त्योहारी सीजन में भारत में 52.38 लाख से ज्यादा वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई थी. मौजूदा साल 2026 में भी यह रफ्तार जबरदस्त बनी हुई है, जहां केवल नवरात्रि के शुरुआती 9 से 10 दिनों के भीतर ही देश में 11.23 लाख से अधिक गाड़ियां बिक गईं. इसका मतलब है कि त्योहारों के दौरान देश में हर एक मिनट में लगभग 80 से ज्यादा वाहन खरीदे जाते हैं.


किस सेगमेंट की गाड़ियां बिकती हैं सबसे ज्यादा?


जब बात सबसे ज्यादा बिकने वाले सेगमेंट की आती है, तो संख्या के मामले में टू-व्हीलर सेगमेंट हमेशा से ही पूरी दुनिया और भारतीय बाजार का असली किंग रहा है. कुल वाहन बिक्री में अकेले दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 70 से 75 फीसदी तक होती है.


त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण इलाकों में अच्छी फसल और मजबूत मांग के चलते हर साल 30 लाख से 35 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर शोरूम से बाहर निकलते हैं. मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए दीपावली पर बाइक या स्कूटर खरीदना सबसे पसंदीदा विकल्प होता है.


फोर-व्हीलर में एसयूवी का जलवा


चार पहिया वाहनों यानी पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट की बात करें, तो इस समय भारतीय बाजार में एकतरफा बदलाव देखने को मिल रहा है. इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा मांग SUV की होती है. त्योहारी सीजन के दौरान बिकने वाली हर दो नई कारों में से एक कार एसयूवी सेगमेंट की होती है.


लोग छोटी हैचबैक कारों के मुकाबले कॉम्पैक्ट और मिड-साइज एसयूवी को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं. पूरे फेस्टिव सीजन में औसतन 4.5 लाख से 5.5 लाख से अधिक पैसेंजर कारें बेची जाती हैं, जिसमें लगभग आधी हिस्सेदारी सिर्फ एसयूवी की होती है.


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इलेक्ट्रिक वाहनों की भी बढ़ी रफ्तार


FADA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में कुल ऑटोमोबाइल बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी भी करीब 10.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है. पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और कंपनियों द्वारा दिए जा रहे आकर्षक फेस्टिव डिस्काउंट की वजह से इस सेगमेंट में भी सालाना आधार पर 26 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत ग्रोथ देखी जा रही है.कुल मिलाकर, दीपावली का यह मौका हर साल भारतीय ऑटो सेक्टर की अर्थव्यवस्था को एक जबरदस्त बूस्टर डोज देने का काम करता है.


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