अनुराधा पौडवाल भारतीय संगीत जगत की सबसे बेहतरीन सिंगर में से एक हैं. अनुराधा पौडवाल की आवाज को दर्शकों ने फिल्मी गीतों में जितना पसंद किया उतना ही प्यार उन्हें भक्ति गीत और भजनों के लिए भी मिला. अपने करियर में काफी शोहरत और सफलता पाने वाली अनुराधा पौड़वाल की शादी कम उम्र में ही हो गई थी. उन्होंने अपनी लाइफ में कई खुशनुमा पल देखने के अलावा कई दर्दभरे पलों का भी अनुभव किया.
अनुराधा पौडवाल ने कम उम्र में ही अपने पति को खो दिया था. जबकि कुछ सालों पहले उनके बेटे का निधन हो गया था. अमिताभ बच्चन की फिल्म से बॉलीवुड में बतौर प्लेबैक सिंगर अपना करियर शुरू करने वाली अनुराधा ने 90 के दशक में बॉलीवुड से दूरी बना ली थी. आइए आज अनुराधा के 72वें बर्थडे पर उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर एक नजर डालते हैं.
लता मंगेशकर और आशा भोसले के गानों से सीखा गाना
अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को कर्नाटक के कारवार में एक मराठी परिवार में हुआ था. उनका असली नाम अलका नाडकर्णी था. हालांकि शादी के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया. अनुराधा ने संगीत की कभी कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी. बल्कि उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज सिंगर्स के गानों से गाना सीखा था.

15 की उम्र में शादी, सड़क हादसे में पति को खोया
अनुराधा पौडवाल की शादी महज 15 साल की उम्र में हो गई थी. उनका ब्याह एस. डी. बर्मन के असिस्टेंट अरुण पौडवाल से साल 1969 में हुआ था. तब अनुराधा की उम्र सिर्फ 15 साल थी. बता दें कि अरुण खुद भी म्यूजिक डायरेक्टर थे. शादी के बाद अनुराधा और अरुण ने तीन बच्चों का वेलकम किया. साल 1991 में एक सड़क हादसे में अनुराधा के पति का निधन हो गया था. पति की मौत के बाद अनुराधा ने दूसरी शादी नहीं की. वो पिछले 35 सालों से सिंगल लाइफ जी रही हैं.

35 साल के बेटे का किडनी की बीमारी के कारण निधन
अनुराधा ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उनकी पहली संतान जो एक बेटी थी उसका जन्म के 25 दिन बाद ही निधन हो गया था. इसके बाद सिंगर ने एक बेटे आदित्य पौडवाल और एक बेटी कविता पौडवाल को जन्म दिया. कविता एक सिंगर हैं. वहीं आदित्य सिंगर और संगीतकार थे. उन्होंने साल 2020 में किडनी की बीमारी के चलते 35 साल की उम्र में दुनिया छोड़ दी थी.
अमिताभ-जया की फिल्म से बॉलीवुड में आगाज
अनुराधा ने पहले डबिंग आर्टिस्ट के रूप में काम किया था और रेडियो प्रोग्राम में भी गाने गाए. इसके बाद बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगर के रूप में अपनी शुरुआत साल 1973 में आई फिल्म 'अभिमान' से की थी. तब उनकी उम्र 19 साल थी. बता दें कि अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की इस मूवी में उन्होंने जया के किरदार के लिए एक संस्कृत श्लोक गाया था.

10 साल बाद मिली पहली बड़ी पहचान
1973 में बॉलीवुड डेब्यू करने वाली अनुराधा को पहली बड़ी और खास पहचान जैकी श्रॉफ की साल 1983 की फिल्म 'हीरो' के गाने 'तू मेरा जानू है' से मिली. इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में 'बहुत प्यार करते हैं', 'तू मेरी जिंदगी है', 'तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई', 'नजर के सामने जिगर के पास', 'तू मेरी जिंदगी है', 'दिल है कि मानता नहीं' सहित कई बेहतरीन गानों में अपनी सुरीली और मखमली आवाज से अमिट छाप छोड़ी.

भजनों से भी जीता फैंस का दिल
90 के दशक में टी-सीरीज के मालिक और सिंगर गुलशन ग्रोवर के साथ उन्होंने एक से बढ़कर एक डिवोशनल सॉन्ग गाए. वो 'ओम जय अंबे गौरी' (आरती), 'श्रद्धा की ज्योति', 'जय मां अंबे जय जगदंबे', 'दुर्गा अमृतवाणी', 'महालक्ष्मी अष्टकम', 'मैं तो शिव की पुजारिन बनूंगी', 'आरती कुंज बिहारी की', 'हे राम', 'मिलता है सच्चा सुख केवल शिव तुम्हारे चरणों में' आदि से घर-घर में लोकप्रिय हुईं.
बॉलीवुड से क्यों बनाई दूरी?
करियर के पीक पर अनुराधा ने 90 के दशक में गुलशन ग्रोवर के साथ जुड़कर सिर्फ डिवोशनल सॉन्ग गाने का फैसला लिया था. एक इंटरव्यू में सिंगर ने बॉलीवुड छोड़ने की वजह के बारे में बात करते हुए कहा था कि फिल्मों के बदले स्वरुप के कारण भी उन्होंने फिल्म इंडट्री से दूरी बना ली. अनुराधा ने अब प्रोफेशनल सिंगिंग काफी हद तक काम कर दी है. अनुराधा ने 1990, 1991 और 1992 में लगातार तीन बार बेस्ट सिंगर के फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किए थे.

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