लखनऊ: बौद्ध धम्म दीक्षा लेते हुए हिदू देवी-देवताओं को के प्रति श्रद्धा न रखने की प्रतिज्ञा लेने वाले समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी अब बैकफुट पर आ गए हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामगोपाल यादव के पद से हटाने की चेतावनी देने पर राजकुमार भाटी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि रामगोपाल यादव ने जो कुछ कहा है वह उन्होंने उनके और पार्टी के हित में ही कहा है। पार्टी में बड़ों को टोकने और डांटने का पूरा अधिकार है।
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि, 'समाजवादी पार्टी मेरे लिए केवल पार्टी नहीं, परिवार की तरह है। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। सबसे बड़ी बात पहचान दी है। यदि आज देश में मुझे पहचाना जा रहा है तो सिर्फ पार्टी की वजह से। मैं पार्टी का समर्पित और अनुशासित कार्यकर्ता हूं।'
भाटी ने अपने समर्थकों को टोकाभाटी ने अपने पक्ष में बयान देने वालों को टोकते हुए कहा है कि, 'जिस तरह बच्चों की किसी गलती पर घर के बड़े उसे टोकते हैं और समझाते हैं, इसी तरह पार्टी में भी बड़ों को पूरा हक है कि वह छोटों को नियंत्रित रखें। जरूरत पड़ने पर सलाह दें और आवश्यक समझें तो डांट भी लगाएं। आदरणीय प्रोफेसर रामगोपाल यादव जी हर दृष्टिकोण से मेरे बड़े हैं और मैं उनका अत्यधिक सम्मान करता हूं। उन्होंने जो शब्द बोले वह मेरे और पार्टी के हित में ही बोले हैं। कुछ साथी उनकी आलोचना कर रहे हैं और कटाक्ष कर रहे हैं। उनसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे ध्यान रखें कि बड़ों के सम्मान में कभी कमी नहीं आनी चाहिए।'
'सोशल मीडिया पर गलतफहमी पैदा न करें'उन्होंने कहा है कि, 'पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी, आदरणीय प्रोफेसर साहब, चाचा शिवपाल जी और परम आदरणीय गुरुजी उदय प्रताप सिंह जी का स्नेह एवं आशीर्वाद सदैव ही मुझे मिलता रहा है। कृपया कोई ऐसी बातें सोशल मीडिया पर ना लिखें या ना बोलें जिससे लोगों के बीच गलतफहमी पैदा हो। बुरे वक्त में जिन लोगों का प्यार, सहयोग और समर्थन मुझे प्राप्त होता रहा है उन सबका मैं अत्यंत आभारी हूं। धन्यवाद।'
भाटी ने दिल्ली में ली थी दीक्षाराजकुमार भाटी ने बीते सप्ताह दिल्ली के अंबेडकर भवन में बौद्ध महासभा के धम्म दीक्षा कार्यक्रम में बौद्ध धर्म की दीक्षा और प्रतिज्ञाएं ली थीं। नियमानुसार बौद्ध धम्म दीक्षा लेने वाला व्यक्ति यदि हिंदू होता है तो उसे डॉ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बौद्धों को दिलाई गईं 22 प्रतिज्ञाएं भी लेना होती हैं। इन प्रतिज्ञाओं में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा का त्याग करना भी शामिल है।
हिंदू देवताओं के प्रति श्रद्धा के त्याग की शपथधम्म दीक्षा के दौरान शपथ ली जाती है कि, 'मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा। मैं राम और कृष्ण में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा। मैं गौरी, गणपति या अन्य हिंदू देवी-देवताओं में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा। मैं ईश्वर के अवतार में विश्वास नहीं रखूंगा और मैं यह नहीं मानूंगा कि बुद्ध विष्णु के अवतार थे।' धम्म दीक्षा लेने वाला व्यक्ति बौद्ध धर्म का अनुयायी हो जाता है। यह दीक्षा लेने के बाद भाटी सैद्धांतिक रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायी हो गए, लेकिन उन्होंने बाद में इसका खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा है।
पद से हटाने की चेतावनीयूपी की राजनीति में राजकुमार भाटी के धर्म परिवर्तन करने का मुद्दा गर्मा गया। इस पर पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि वे ऐसे बयान देते रहेंगे तो उनको पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'राजकुमार भाटी का वह व्यक्तिगत बयान हो सकता है, हम लोग उसका विरोध कर चुके हैं। राजकुमार भाटी को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। अगर ऐसे बयान देते रहेंगे तो पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया जाएगा।'
राजकुमार भाटी के धम्म दीक्षा लेने से समाजवादी पार्टी ऐसे समय में मुसीबत में फंस गई जब यूपी में कुछ ही माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और सत्ताधारी पार्टियां उस पर भगवान राम और हिंदू धर्म की विरोधी होने का आरोप लगा रही हैं। ऐसे में रामगोपाल यादव ने भाटी को कड़ी संदेश देकर सपा का रुख साफ कर दिया है।
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