पटना: मोकामा विधायक अनंत सिंह पर कार्रवाई कहीं जदयू नेतृत्व के लिए उल्टा न पड़ जाए। जिस तरह से अनंत सिंह के समर्थन में नेताओं की गोलबंदी और जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, वो जदयू नेतृत्व के विरुद्ध गोलबंदी के संकेत से कम नहीं। अभी भरत तिवारी एनकाउंटर की आंच धीमी भी नहीं पड़ी कि जनता दल यूनाइटेड की तरफ से अनंत सिंह पर कार्रवाई का ठीकरा फोड़ना सवर्ण आंदोलन का एक बड़ा रास्ता न खोल दे। ऐसा हुआ तो राजद की राजनीति को अपरोक्ष रूप से मदद मिलना ही माना जाएगा। बिहार में एनडीए के सभी पांचों पार्टियों के लिए नई मुसीबत बन सकता है।






डकैत हैं जदयू के कुछ नेता: आनंद मोहन के 6 साल के निलंबन पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जदयू की भितरिया राजनीति पर काफी कटु टिप्पणी की है। उन्होंने जेडीयू की कार्यशैली और वहां की स्थिति पर चिंता भी प्रकट की। आनंद मोहन ने जेडीयू की कार्रवाई और राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी में बड़े मुद्दों को छोड़कर छोटे या अलग किस्म के मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसे उन्होंने 'सोने की लूट, कोयला पर छापा' की कहावत से तुलना की।




आनंद मोहन यही नहीं रुके, उन्होंने जेडीयू के कुछ सक्रिय नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे कई लोग हैं जिनका न तो पार्टी की विचारधारा से लगाव है और न ही नेतृत्व के प्रति कोई निष्ठा। उन्होंने इनकी तुलना चंबल के डकैतों से करते हुए कहा कि दलों के भीतर कुछ लोगों ने अपने सिंडिकेट और गिरोह बना रखे हैं।






कार्रवाई बिल्कुल गलत: वाल्मीकि सिंहपूर्व एमएलसी वाल्मीकि सिंह ने कहा कि पर जो कार्रवाई जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के की ओर से हुईं है, वो बिल्कुल गलत है। अनंत सिंह हमेशा नीतीश कुमार, निशांत कुमार और पार्टी का ही नाम लेते रहे हैं। दरअसल, अभी जो दो-चार लोग पार्टी चला रहे हैं, वे लोग नीतीश कुमार के वैसे समर्थक को पार्टी से दूर कर रहे हैं जो निशांत कुमार को चाहते हैं। अनंत सिंह ने जो किया वो क्रिया के बदले प्रतिक्रिया के कारण किया है। वर्तमान नेतृत्व के दो-चार लोग बिल्कुल गलत कर रहे हैं।






अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह का धमाकाजेडीयू की ओर से मोकामा के विधायक अनंत सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद, छोटू सिंह ने कहा कि ये बिल्कुल गलत हुआ है। छोटू सिंह ने कहा कि अनंत सिंह ने अपनी कुर्बानी देकर नीतीश कुमार की सरकार बचाई थी। तब ये लोग अनंत सिंह के पास गए और उस विपरीत स्थिति में सरकार बचाई।




उन्होंने ये भी दावा किया कि पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी और नेताओं के रवैये के कारण अब जेडीयू का बर्बाद होना तय है। अनत सिंह और मैं (छोटू सिंह) हमेशा नीतीश कुमार और ललन सिंह के समर्थक रहे हैं। अब निशांत कुमार के नेतृत्व में बिहार का विकास देखना चाहते हैं। मगर, कुछ लोग अपना सिक्का चलाना चाहते हैं और ये तो होने वाला है नहीं।






कार्रवाई की प्रक्रिया गलत: राम वत्सराजनीतिक विश्लेषक राम वत्स का मानना है कि जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधायक का पक्ष सुने बिना ही उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का जो फैसला लिया है, वो गलत है। उन्हें किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले अनंत सिंह को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। परन्तु ऐसा नहीं कर जनता दल (यू) ने अपनी मुश्किलें बढ़ा ली है।




उन्होंने अनंत सिंह का पक्ष जाने बगैर निष्कासन का जो फैसला लिया है, उसे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। अनंत सिंह के समर्थकों ने खुलेआम इस नाइंसाफी का जिक्र कर जनता दल (यू) नेतृत्व की परेशानी बढ़ा दी है कि वे इस फैसले के विरुद्ध वकीलों से राय ले रहे हैं। जदयू नेतृत्व के फैसले को न्यायालय में चुनौती देंगे।

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