मुंबई : जैश-ए-मोहम्मद से लिंक रखने के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर ने माहिम पुलिस को बताया कि वह अपने धर्म के प्रति काफी आस्था रखता है। देश में आए दिन कहीं न कहीं धार्मिक स्थलों के टूटने से वह परेशान रहता था, इसलिए वह सोशल मीडिया पर मुस्लिम उपदेशकों का वीडियो को देखा करता था। हालांकि, आरोपी के डिजिटल सक्रियता की माहिम पुलिस साइबर पुलिस की मदद से टेक्निकल जांच कराने में जुटी है। सभी सामग्रियों को जब्त को उसे कालीना फोरेसिंक लैब भेज दी गई है। ATS ने आरोपी को पूछताछ के बाद महिम पुलिस को सौंप दिया था। महिम पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत केस दर्ज किया है। सूत्र बताते हैं, जांच के आधार पर UAPA की धाराएं जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है।
10 साल से मुंबई में अकेला रहता था हसनहसन को माहिम पुलिस ने शनिवार को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उसे चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। ATS के अनुसार, आरोपी मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के भंकरद्वारी गांव का रहने वाला है। वह 10 साल से मुंबई में अकेला रह रहा था। परिवार में 6 भाई और 2 बहनें हैं। हसन तीसरे नंबर पर है। उसकी शादी नहीं हुई है। गांव में उसकी मां और भाभी रहती हैं। पिता बीमार हैं। हसन ने हिफ्ज-ए-कुरान की पढ़ाई की है।
रात को राइडर बनकर करता था जासूसीआरोपी मोहम्मद हसन अबू के मोबाइल से जांच एज़ेंसी ने 39 संदिग्ध पोस्ट बरामद किए हैं। वह दिन में इत्र बेचता था। रात में बाइक राइडर बनकर मुंबई और आसपास के संवेदनशील ठिकानों का फोटो-विडियो पाकिस्तान के एक पुलिस अधिकारी को भेजता था। महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की कालाचौकी यूनिट की टिप पर माहिम पुलिस ने माहिम मेट्रो स्टेशन के पास लक्षमी बिल्डंग के नजदीक से 22 अक्टूबर को अरेस्ट किया था। जांच में पता चला कि हसन पाकिस्तानी टेलिग्राम चैनलों के संपर्क में था और कथित भड़काऊ सामग्री पोस्ट किया करता था। इसकी सूचना ATS को मिली थी, ज़िसके बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया। वह माहिम के एलजे रोड में किराए के फ्लैट में रहता था।
लैब भेजे गए 39 स्क्रीनशॉटATS के मुताबिक, आरोपी मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के पास से एक नामचीन कंपनी के महंगे मोबाइल फोन मिले हैं । जांच में फोन से भड़काऊ 39 पोस्ट मिले हैं। इसका स्क्रीनशॉट सबूत के तौर बरामद कर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है। जांच में पता चला कि हसन 'इंडियन मुस्लिम' नाम के टेलिग्राम ग्रुप पर 1 जून 2026 को जैश प्रमुख मसूद अजहर के बाबरी मस्जिद से जुड़े भड़काऊ ऑडियो भाषण शेयर किया था। साथ ही वह 'IBN-e-Qasim' नाम के एक कट्टरपंथी टेलिग्राम चैनल से जुड़ा था, जो पाकिस्तानी संगठन द्वारा ऑपरेट किया जाता है। वह मसूद अजहर के भाषणों के ऑडियो को सुना करता था।
सोशल मीडिया पर जिहाद का समर्थनजांच अधिकारियों को हसन के इंस्टाग्राम और X अकाउंट पर ‘अब जिहाद का जमाना आ गया है’ जैसे विवादित पोस्ट और जिहाद का समर्थन करने वाले कई संदेश मिले हैं। आरोप है कि उसने मुस्लिम युवाओं से हथियार उठाने की अपील किया करता था। उसने अपने इंस्टा अकाउंट ‘हसनशेख6603’ पर 8 सितंबर को मुंबई यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित चूक की खबर पर हसन से आपत्तिजनक कमेंट किया था। उसने इंदिरा गांधी की मौत जैसी घटना मोदी के साथ होने की बात कही थी। इस टिप्पणी की भी जांच हो रही है। ATS को शक है कि आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों (PIOs) के सीधे संपर्क में था। दावा है कि पाक के एक पुलिस अधिकारी के संपर्क में आकर वह उसके लिए काम कर रहा था। कथित तौर पर मुंबई और आसपास के जगहों की रेकी कर उसको फोटो-वीडियो भेजा करता था। हसन पर राष्ट्रविरोधी सामग्री शेयर कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश रचने का भी आरोप है।
हसन के वट्सऐप में UP, बिहार- MP के 7 लोग जुड़ेपुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने एक वट्सऐप ग्रुप बनाया था, जिसमें कुल सात लोग शामिल थे। इस ग्रुप से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के लोग जुड़े हुए थे। आरोपी इस ग्रुप में जिहाद से संबंधित बातें करता था। बाकी 6 लोग उसकी बात से सहमत होकर और भी कंटेट पोस्ट किया करता था। वह कथित तौर पर ग्रुप के सदस्यों से कहता था कि उन्हें अपनी कौम के लिए कुछ करना चाहिए। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि ग्रुप में किस तरह की चर्चाएं होती थीं, इसके सदस्य कौन-कौन थे और क्या अन्य लोग भी इस गतिविधि में शामिल थे। साथ ही, ग्रुप के जरिए कथित तौर पर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस हसन के अलावा अन्य 6 सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।