नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बढ़ने के साथ ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। आकर्षक डिस्काउंट, भारी छूट और सीमित समय के ऑफर के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ठग नामी ई-कॉमर्स कंपनियों के लोगों, प्रॉडक्ट की तस्वीरों और उनके विज्ञापनों की नकल कर फर्जी शॉपिंग ऐड तैयार करते हैं। ये विज्ञापन देखने में इतने असली लगते हैं कि लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। विज्ञापन पर क्लिक करते ही यूजर को ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जो दिखने में किसी नामी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट जैसी होती है, लेकिन वहां किया गया पेमेंट सीधे ठगों तक पहुंच जाता है।
भारी छूट और सीमित समय के ऑफर से रहे सावधानठग लोगों को आकर्षित करने के लिए महंगे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य प्रॉडक्ट बेहद कम कीमत पर देने का दावा करते हैं। ऑफर खत्म होने की जल्दबाजी दिखाकर लोगों पर तुरंत खरीदारी करने का दबाव बनाया जाता है। ऐसे में ग्राहक वेबसाइट की जांच किए बिना पेमेंट कर देते हैं। कई मामलों में पैसे कटने के बाद सामान नहीं मिलता, जबकि कुछ फर्जी वेबसाइट पेमेंट के दौरान बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करती है।
मामले में क्या बोले डीसीपीIFSO के डीसीपी गौरव त्यागी ने कहा कि अगर किसी फर्जी वेबसाइट पर पेमेंट कर दिया है या साइबर ठगी का शक है, तो तुरंत बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को सूचना दें। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। केवल लोगो और प्रॉडक्ट की तस्वीरें देखकर वेबसाइट को असली नहीं मानना चाहिए। वेबसाइट के यूआरएल, डोमेन, विक्रेता की जानकारी, रिव्यू और रिटर्न पॉलिसी की जांच करना भी जरूरी है। ,
खरीदारी से पहले बरतें ये सावधानियां
- अनजान लिंक पर क्लिक करने की बजाय कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट खुद खोलें।
- सोशल मीडिया या मेसेज पर मिले डिस्काउंट को कंपनी की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जाकर वेरिफाई करें।
- 'लिमिटेड टाइम ऑफर' या 'आखिरी मौका' जैसे संदेशों के दबाव में आकर खरीदारी न करें।
- बाजार कीमत से बहुत कम दाम पर महंगे प्रॉडक्ट मिलने का दावा संदेह पैदा कर सकता है।
- वेबसाइट, विक्रेता की विश्वसनीयता जांचे बिना पैसे ट्रांसफर न करें।
- सेलर की जानकारी. ग्राहकों की प्रतिक्रिया, पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें।
- ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड का पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें