रिटायरमेंट के लिए निवेश करना जितना जरूरी है, जरूरत पड़ने पर उस पैसे तक पहुंच होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड दोनों लंबी अवधि में बचत बनाने के विकल्प हैं, लेकिन इनके निकासी नियम, लॉक-इन अवधि और टैक्स लाभ अलग-अलग हैं. अगर आप 35 साल की उम्र में घर खरीदने, नौकरी छोड़ने या किसी बड़ी जरूरत के लिए अपनी जमा पूंजी निकालना चाहते हैं, तो निवेश से पहले इन नियमों को समझना जरूरी है.


NPS में हर स्थिति में खाता बंद करना जरूरी नहीं है, निर्धारित शर्तें पूरी होने पर निवेशक अपने स्वयं के योगदान का 25 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं. इसके लिए आमतौर पर खाता खुलने के तीन साल पूरे होना जरूरी है. बच्चों की शिक्षा या शादी, घर खरीदने और कुछ चिकित्सा संबंधी जरूरतों जैसे निर्धारित उद्देश्यों के लिए यह सुविधा मिलती है. हालांकि, निकासी की संख्या और दो निकासी के बीच अंतराल को लेकर नियम लागू होते हैं. इसलिए पैसा निकालने से पहले अपने खाते की पात्रता जांचना जरूरी है.


NPS से 35 साल की उम्र में कितना पैसा निकाल सकते हैं?


NPS में समय से पहले खाता बंद करने पर निकासी की सीमा लागू होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित नियमों के तहत समय से पहले बाहर निकलने पर कुल जमा राशि का अधिकतम 20 प्रतिशत एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि कम से कम 80 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदनी होती है. हालांकि, छोटी जमा राशि वाले खातों के लिए अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं.


उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक के NPS खाते में 10 लाख रुपये जमा हैं और वह निर्धारित शर्तों के तहत समय से पहले बाहर निकलता है, तो वह 2 लाख रुपये तक एकमुश्त प्राप्त कर सकता है. शेष राशि का इस्तेमाल पेंशन देने वाली एन्युटी खरीदने में करना होगा, वास्तविक निकासी पात्रता लागू नियमों और खाते की स्थिति पर निर्भर करेगी.


निवेशकों के लिए क्या है बेहतर विकल्प?


विशेषज्ञों के अनुसार, रिटायरमेंट के लिए केवल एक निवेश विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग साधनों में बचत करना उपयोगी हो सकता है. NPS उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, जो लंबे समय तक पैसा रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं. दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड लॉक-इन पूरा होने के बाद अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन दे सकते हैं.


निवेश शुरू करने से पहले इमरजेंसी फंड बनाना और घर, शिक्षा या अन्य बड़े खर्चों के लिए अलग बचत रखना भी जरूरी है. सही विकल्प चुनते समय अपनी आय, भविष्य की जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और टैक्स स्थिति को ध्यान में रखें.


किसमें मिलते हैं ज्यादा टैक्स लाभ?


पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र NPS योगदान पर आयकर कानून की धारा 80CCD(1) और 80CCD(1B) के तहत कटौती मिल सकती है. नई टैक्स व्यवस्था में पात्र वेतन भोगियों के लिए नियोक्ता के योगदान पर धारा 80CCD(2) के तहत निर्धारित सीमा के अनुसार लाभ उपलब्ध हो सकता है.


वहीं, रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड में NPS जैसे विशेष योगदान संबंधी टैक्स लाभ नहीं मिलते. निवेश भुनाने पर होने वाले लाभ का टैक्स फंड के प्रकार और लागू नियमों के आधार पर तय होता है.


रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड में कितना लचीलापन?


रिटायरमेंट आधारित म्यूचुअल फंड में आमतौर पर पांच साल या निर्धारित रिटायरमेंट उम्र तक, जो भी पहले हो, लॉक-इन की शर्त लागू हो सकती है. अवधि पूरी होने के बाद निवेशक पात्र यूनिट्स को भुना सकते हैं. इसके लिए NPS की तरह अनिवार्य रूप से एन्युटी खरीदने की जरूरत नहीं होती.


हालांकि, हर नए निवेश की लॉक-इन अवधि अलग हो सकती है. पैसा निकालने पर मिलने वाले लाभ पर फंड की श्रेणी और लागू कैपिटल गेन टैक्स नियमों के अनुसार कर लग सकता है.


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