नई दिल्ली: ईस्ट विनोद नगर में फटा नोट लेने से इनकार करने पर की गई मारपीट से आहत होकर जहर खाने वाले डिलिवरी बॉय समीर हुसैन (24) ने 16 दिन बाद दम तोड़ दिया। समीर की मौत के बाद पुलिस ने गुरुवार को आत्महत्या के लिए उकसाने के तहत मामला दर्ज कर आरोपी बाप-बेटे को गिरफ्तार कर लिया। मामले में समीर का एक विडियो एक बार फिर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने उनसे मारपीट करने वाले आरोपी बाप-बेटे पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी और कुछ अन्य बातें भी कही थीं।
क्या है मामला?पुलिस अधिकारी ने बताया कि समीर हुसैन अपने परिवार के साथ मकान नंबर-149, खिचड़ीपुर, कल्याणपुरी में रहते थे। परिवार में पिता जाकिर हुसैन और अन्य सदस्य है। समीर डिलिवरी बॉय एग्जिक्यूटिव के तौर पर काम करते थे। 4 अक्टूबर की रात 11:03 बजे कॉलर समीर हुसैन ने पीसीआर कॉल कर बताया कि कि वह D-117, ईस्ट विनोद नगर में डिलिवरी करने गए थे। वहां रहने वाले बाप-बेटे रामपाल सिंह (65) और राकेश उर्फ बंटी (30) ने फटा नोट लेने से इनकार करने पर उनकी बुरी तरह पिटाई की है।
- पीसीआर कॉल करने के कुछ घंटे बाद समीर ने डिलिवरी के दौरान हुई पूरी घटना का जिक्र करते हुए एक विडियो बनाया। इसके बाद जहरीला पदार्थ खा लिया। समीर को 5 अक्टूबर को LBS अस्पताल लाया गया। अपने बयान में उन्होंने बताया कि फटा नोट न लेने के कारण ही राकेश ने उन्हें मारा। उसके पिता ने भी गालियां दीं और मारपीट की। समीर का अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन 20 अक्टूबर को उन्होंने दम तोड़ दिया।
21 अक्टूबर को था समीर का बर्थडेसमीर की मां ने बताया कि उनके बेटे का जन्मदिन 21 अक्टूबर को था, लेकिन एक दिन पहले उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि क्या गरीब होना गुनाह है। उन्होंने कहा कि आरोपी राकेश और उसके पिता रामपाल ने पिटाई के बाद कहा था कि तू गरीब है, मेरा कुछ नहीं कर सकता। राकेश ने कहा था कि मेरा चाचा नेता है, तुझे जो करना है कर ले। इसके बाद राकेश ने शटर उठाने वाले सरिये से समीर को बुरी तरह पीटा। उन्होंने कहा कि मुझे न्याय चाहिए। आरोपी बाप-बेटे को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
समीर ने विडियो में क्या-क्या कहा
'मेरी आर्थिक स्थिति को लेकर अपमानित करने से दुख पहुंचा' जहर खाने से पहले रिकॉर्ड किए गए विडियो में समीर ने कहा, 'मैं मेहनत करने में विश्वास रखता हूं। मेरे पास कोई वाहन नहीं है, इसलिए मैं साइकल से डिलिवरी करता हूं। मेरा मानना है कि कम खाऊंगा, लेकिन अपनी मेहनत की कमाई खाऊंगा।' 4 अक्टूबर की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि करीब 150 रुपये के कॉफी ऑर्डर के लिए ग्राहक को नकदी का इंतजाम करने में लगभग 15 मिनट लगे थे। मुझे देरी से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन मैंने ग्राहक से 10 रुपये का फटा नोट बदलने के लिए कहा था। मैंने उनसे विनम्रता से कहा, 'अंकल, कृपया इसे बदल दीजिए, लेकिन वह बदतमीजी करने लगे। उन्होंने कहा मेरे पास यही है, लेना है तो लो, वरना यहां से चले जाओ। इसके बाद उसने मुझे तीन थप्पड़ मारे। मैंने पलटकर मारपीट नहीं की, लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर अपमानित किए जाने से गहरा दुख पहुंचा।'
- विडियो में समीर ने सवाल किया, 'क्या गरीब होना गाली है? मैं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहता हूं। कभी अपने पिता से से पैसे नहीं मांगे। समीर ने विडियो में यह आशंका भी जताई कि पैसे नहीं होने के कारण मुझे न्याय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंसा का सामना करने वाले डिलिवरी कर्मचारियों की मदद के लिए क्या व्यवस्था है।
- विडियो में उन्होंने कहा, 'मैं आत्महत्या कर लूंगा, क्योंकि बीच सड़क पर मेरी खुद्दारी तो पहले ही तार-तार कर दी गई है।' अपनी मां को संबोधित करते हुए समीर ने कहा कि वह खुद को मजबूत मानता था, लेकिन उसे डर था कि हालात उसे शांति से जीने नहीं देंगे। थप्पड़ मारे जाने की घटना से मुझे बहुत गहरी चोट पहुंची है।