भुवनेश्वर: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया गांवों को लेकर दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने दोनों राज्यों के बीच बातचीत और सौहार्दपूर्ण माहौल के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर सामूहिक समाधान तलाशने की जरूरत है। यह विवाद ऐसे समय में फिर गरमा गया है, जब ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी बीजेडी के बीच आंध्र प्रदेश द्वारा विवादित गांवों में ग्रामीण चुनाव कराने को लेकर राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है। दोनों राज्य इन गांवों पर अपना अधिकार जताते हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।






धर्मेंद्र प्रधान बोले- कोटिया ओडिशा और ओड़िया लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्णधर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कोटिया ओडिशा और ओड़िया लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह राज्य की संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि कोटिया को लेकर लंबे समय से जारी सीमा विवाद ओड़िया लोगों की चिंता का विषय रहा है। प्रधान ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर ओडिशा के हितों के लिए एक साथ आएं और विवाद का सामूहिक समाधान खोजें।




ओड़िया की पहचान के लिए संघर्ष जारी रहेगाउन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी राजनेताओं को लेनी चाहिए और बातचीत के जरिए सौहार्दपूर्ण माहौल बनाकर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा करने वालों का बलिदान और योगदान व्यर्थ नहीं जाएगा। ओड़िया की पहचान के लिए संघर्ष जारी रहेगा और राज्य की एकता तथा अखंडता की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।




नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखा पत्रकोटिया विवाद दो दिन पहले उस समय फिर चर्चा में आया, जब बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर पूछा कि राज्य की भाजपा सरकार ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं। पटनायक ने यह सवाल भी उठाया कि क्या राज्य सरकार इसलिए चुप है, क्योंकि केंद्र की एनडीए सरकार आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के समर्थन पर निर्भर है। इसके जवाब में ओडिशा सरकार ने बीजेडी के 24 साल के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उस दौरान इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।




28 गांवों में से 21 पर आंध्र प्रदेश का दावाकोटिया गांव ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा पर पूर्वी घाट क्षेत्र में स्थित हैं। ये ओडिशा के कोरापुट जिले की कोटिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आते हैं। कुल 28 गांवों में से आंध्र प्रदेश 21 गांवों पर अपना अधिकार जताता है। यह विवाद ब्रिटिश शासन के समय से चला आ रहा है। वर्ष 1968 में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चुनावों के दौरान यह मुद्दा अक्सर फिर से सामने आता है। इन गांवों के निवासियों को दोनों राज्यों में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है।




सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी है विवादवर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह टिप्पणी भी की थी कि राज्यों के बीच सीमा विवाद को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत संसद के माध्यम से सुलझाना सबसे बेहतर होगा। वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया गांवों में ग्रामीण चुनाव कराए जाने के बाद ओडिशा सरकार ने 2022 में उसके खिलाफ अदालत की अवमानना संबंधी याचिका दायर की थी।

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