लखनऊ: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा ने दलित वेटों की घेराबंदी तेज कर दी है। पीडीए के 'डी' यानी दलित को अपने पाले में मजबूती से खड़ा करने के लिए अब पार्टी दलित समाज के संतो और धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं को जरिया बनाएगी। इसी रणनीति के तहत सपा की एससी सेल 5 नवंबर को लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम करने की तैयारी में है।
इसमें उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और हरियाणा के दलित संतों तथा रविदास, कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मानित करने की योजना है। पार्टी की कोशिश समनदास महाराज, कबीरपंथ और महर्षि वाल्मीकि परंपरा से जुड़े अनुयायियों तक पहुंच बनाने की है। यानी सपा का निशान केवल बसपा का परंपरागत जाटव आधार नहीं, बल्कि अलग-अलग दलित जातियों और पंथों के बीच अपना सामाजिक विस्तार करना है।
2024 के चुनाव में बसपा का नहीं खुला था खातासपा की इस कवायद के पीछे 2027 का चुनावी गणित है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में ने 43 सीटें जीती, जबकि बसपा का खाता तक नहीं खुला। बसपा की इस चुनावी कमजोरी में सपा को दलित राजनीति में अपने विस्तार की गुंजाइश दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव ने इसकी झलक दिखाई थी। फैजाबाद और मेरठ जैसी सामान्य सीट पर दलित प्रत्याशी को उतारा था। फैजाबाद में तो सपा नेता अवधेश प्रसाद को उतारने का फैसला कामयाब भी रहा। वहीं, मेरठ में मामूली वोटों के अंतर से सपा प्रत्याशी को हार मिली थी।
दलित समाज के 'इन्फ्लुएंसर' साधने की रणनीतिसपा इस बार सीधे राजनीतिक चेहरों तक सीमित रहने के बजाय दलित समाज पर असर रखने वाले संतों, पंथों और संस्थाओं तक पहुंच बना रही है। इसके पीछे कोशिश ऐसे सामाजिक नेटवर्क खड़े करने की है, जिनके जरिए पार्टी का संदेश दलित बस्तियों और अलग-अलग बिरादरियों तक पहुंच सके। यह उस वोटर को साधने की कोशिश भी है जो बसपा से दूर तो हुआ है, लेकिन अभी सपा का स्थायी मतदाता नहीं बना है।
दलित वोटों के लिए चौतरफा मुकाबलासपा के लिए यह मैदान खाली नहीं है। उसे दलित वोटों के लिए बसपा के साथ बीजेपी से भी मुकाबला करना है। वही, चंद्रशेखर भी एक नए दावेदार के तौर पर उभरे हैं। 2024 में ने नगीना लोकसभा सीट जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई है। इसलिए अखिलेश यादव की कोशिश दलित मतदाताओं को महज चुनाव के वक्त जोड़ने के बजाय पीडीए के स्थायी हिस्सेदार के रूप में स्थापित करने की है। सपा यदि अपने मुस्लिम-यादव और गैर-यादव पिछड़े आधार के साथ दलित वोटों का एक प्रभावी हिस्सा जोड़ने में सफल होती है तो 2027 मे कई सीटों का गणित बदल सकता है।
संतरविदास की जंयती पर कार्यक्रम कर रही बीजेपीबीजेपी संत गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर 29 जुलाई 2026 से 20 फरवरी 2027 तक देशभर में 'श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ चला रही है। इस अभियान का उद्देश्य सामाजिक समरसता, समानता और दलित समाज के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करना है। इसके तहत कलश वंदन अभियान, संत संपर्क अभियान, समरसता यात्रा, छात्रावास संपर्क अभियान और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है।