औरंगाबादः बिहार में औरंगाबाद सदर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी यानी सिविल सर्जन कार्यालय से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सीएस कार्यालय के पूर्व वरिष्ठ लिपिक कृष्ण कुमार वर्मा को रात के अंधेरे में कार्यालय से गुपचुप तरीके से फाइलें चोरी करते हुए पकड़ा गया है।
निलंबित होने के बाद भी सक्रिय था लिपिकजानकारी के अनुसार कृष्ण कुमार वर्मा सिविल सर्जन कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर पदस्थापित थे। उन्हें 14 जुलाई को कर दिया गया था। निलंबन अवधि में उन्हें गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लिपिक के पद पर योगदान कराया गया था।
आरोप है कि निलंबित होने के बावजूद कृष्ण कुमार वर्मा लगातार सिविल सर्जन कार्यालय में सक्रिय थे और महत्वपूर्ण कागजातों से छेड़छाड़ कर रहे थे। बीती रात मौका पाकर वे कार्यालय से फाइलें निकाल रहे थे, तभी उन्हें कर्मियों ने पकड़ लिया।
सूत्रों का कहना है कि जिस समय उन्हें पकड़ा गया, उनके पास से कई महत्वपूर्ण फाइलें और कागजात बरामद हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि वे अपने खिलाफ चल रही जांच से जुड़े दस्तावेजों को गायब करने की कोशिश कर रहे थे।
दो जगह नौकरी करने का भी आरोपयह मामला यहीं तक सीमित नहीं है। कृष्ण कुमार वर्मा पर दो जगह नौकरी करने का भी गंभीर आरोप है। आरोप है कि वे सरकारी नियमों को ताक पर रखकर एक साथ दो स्थानों पर नौकरी कर रहे थे।
इस गंभीर मामले को लेकर ने भी संज्ञान लिया था और जिला पदाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।
स्वास्थ्य महकमे में हड़कंपरात में सिविल सर्जन कार्यालय से फाइल चोरी की इस घटना के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब लिपिक निलंबित है और उसका पदस्थापन गोह PHC में है, तो वह रात के समय बंद पड़े सीएस कार्यालय में कैसे पहुंचा? क्या इसमें कार्यालय के किसी अन्य कर्मी की भी मिलीभगत है?
फिलहाल इस संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बताया जा रहा है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पकड़े गए लिपिक से पूछताछ की जा रही है।
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