नई दिल्‍ली: टमाटर किसानों को दोहरा झटका लग रहा है। भारत की सबसे बड़ी थोक टमाटर मंडियों में से एक पिंपलगांव एपीएमसी में कीमतों में भारी गिरावट आई है। साथ ही सूखे की स्थिति ने मुश्किल पैदा कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सप्‍लाई और कमजोर मांग के बीच कीमतें एक हफ्ते में लगभग 65% लुढ़ गई हैं। ये टूटकर 111 रुपये प्रति 20 किलो रह गई हैं।




खुदरा मोर्चे पर सोमवार को नासिक में टमाटर 20 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहा था, जबकि एक हफ्ते पहले यह लगभग 40 रुपये प्रति किलोग्राम था। यानी इसमें औसतन 50% की गिरावट आई।




असर दिखने में लगता है इतना समयएक रिटेलर ने टीओआई को बताया, 'थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार में दिखने में एक या दो दिन लग जाते हैं। अगर रुझान जारी रहता है तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतों में और गिरावट की उम्मीद है।'




कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में औसत थोक दर 12 अक्टूबर को 20 किलोग्राम के 321 रुपये प्रति क्रेट (लगभग 16 रुपये प्रति किलोग्राम) से घटकर सोमवार को सिर्फ 111 रुपये प्रति क्रेट (5.55 रुपये प्रति किलोग्राम) रह गई। इससे पहले से ही खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे उत्पादकों के बीच चिंता बढ़ गई है।




टमाटर से लबालब बाजारएपीएमसी के एक अधिकारी ने कहा, 'बाजार आवक से भर गया है। पिछले हफ्ते से रोजाना 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट एपीएमसी तक पहुंच रहे हैं। सप्‍लाई में बढ़ोतरी ने मांग को बुरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। इससे कीमतें बेहद निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।'




सोमवार को गुणवत्ता के आधार पर टमाटर की कीमतें 20 रुपये से लेकर 331 रुपये प्रति क्रेट तक रहीं। खराब गुणवत्ता वाले टमाटर केवल 1 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिके, जबकि प्रीमियम उपज की कीमत 16.55 रुपये प्रति किलोग्राम तक थी। व्यापारियों ने कहा कि अगर यही रुख जारी रहा तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है।




आवक बढ़ने की यह है वजहव्यापारियों ने बाजार में आवक बढ़ने का कारण ऊंचे तापमान को बताया। इससे टमाटरों के पकने में तेजी आई। एपीएमसी में टमाटर अनुभाग के प्रभारी एक अधिकारी ने कहा, 'गर्मी के कारण टमाटर सामान्य से पहले पक रहे हैं, जिससे अधिक आवक हो रही है।'




मांग पक्ष ने थोड़ी राहत की पेशकश की है। एपीएमसी अधिकारियों ने नवरात्र अवधि के दौरान मंदी की ओर इशारा किया, जब कमजोर निर्यात मांग के कारण कई थोक बाजार बंद रहे।




उत्पादकों की परेशानी और बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उपभोक्ता राज्य वर्तमान में स्थानीय सप्लाई के जरिये अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इससे नासिक से टमाटर पर निर्भरता कम हो गई है।

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