वॉशिंगटन: भारत समेत दुनियाभर के देशों के लोग जल्द ही एक अद्भुत खगोलीय घटना के साक्षी बन सकते हैं। दरअसल, आज से दो दिन बाद ओरियोनिड उल्कापात होने वाला है। इस रात आसमान से टूटते तारों की बारिश होगी। ओरियोनिड उल्कापात 21-22 अक्टूबर को अपने चरम पर होगा। वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस उल्कापात का सबसे अच्छा नजारा 22 अक्टूबर की सुबह तड़के देखने को मिलेगा, जब चंद्रमा अस्त हो चुका होगा और सुबह की धुंध अभी छाई नहीं होगी।






ओरियोनिड उल्का वर्षा क्या है?ओरियोनिड उल्का वर्षा साल की बेहद खूबसूरत खगोलीय घटनाओं में से एक है। यह खगोलीय घटना लगभग हर साल दिखाई देती है। यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के पीछे छोड़े गए धूल और मलबे के कणों से बनती है। इस मलबे से पृथ्वी हर साल अक्टूबर में गुजरती है। इससे हेली धूमकेतु के टुकड़े पृथ्वी की वायुमंडल में प्रवेश करते समय हवा से घर्षण से जल उठते हैं। इससे टूटते तारे जैसा नजारा दिखाई देता है।






ओरियोनिड उल्का वर्षा कब और कितने बजे दिखेगारिपोर्टों के अनुसार, भारत में ओरियोनिड उल्का वर्षा को देखने के लिए सबसे अनुकूल समय भारतीय समयानुसार लगभग सुबह 3:30 बजे से 5:15 बजे तक रहता है। शहरों के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। मोटे तौर पर, यह उल्का वर्षा 22 अक्टूबर की सुबह तड़के भारत में लगभग हर जगह से दिखाई देगी। शर्त यह है कि रात का मौसम साफ होना चाहिए। बादल न होने पर रात के घने अंधेरे में टूटते तारे तेज रोशनी के साथ धरती की ओर आते दिखेंगे।






भारत में पूर्व या उत्तर-पूर्व के आसमान में दिखेगाओरियोनिड उल्का वर्षा को सबसे अच्छे तरीके से देखने के लिए लोगों को चंद्रमा के अस्त होने का इंतजार करना होगा। यह उल्का वर्षा में भारत में पूर्व या उत्तर-पूर्व के आसमान में देखने को मिलेगा। चंद्रमा अस्त होने के बाद, दर्शक खुले आसमान में पूर्व या उत्तर पूर्व की ओर देखते हुए इस उल्कावर्षा का आनंद ले सकते हैं। इस उल्का वर्षा की एक विशिष्ट विशेषता है। ओरियोनिड उल्काओं में से लगभग आधे उल्काएं चमकती हुई लकीरें छोड़ जाते हैं जो आकाश में कुछ समय के लिए ठहर जाती हैं।

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